मिलेगी नई पहचान: काशी में हर महीने होंगे दो विशिष्ट आयोजन, एससीओ की सांस्कृतिक और पर्यटक राजधानी के लिए पेश करेंगे दावा
देश-दुनिया में सांस्कृतिक राजधानी के रूप में काशी की पहचान पहले से ही है, लेकिन अब एक और उपलब्धि जुड़ने जा रही है। काशी को शंघाई सहयोग संगठन की सांस्कृतिक और पर्यटक राजधानी बनाने के लिए भारत की ओर से दावा पेश किया जाएगा।
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सात वार, नौ त्योहार वाली काशी में अब हर महीने दो विशिष्ट आयोजन कराने की तैयारी है। पहले से होने वाले आयोजनों को और भी बेहतर तरीके से कराया जाएगा। इन सभी आयोजनों से काशी को कला, संस्कृति के माध्यम से नई पहचान दिलाना मुख्य उद्देश्य है।
काशी को शंघाई सहयोग संगठन (शंघाई कॉरपोरेशन आर्गनाईजेशन, एससीओ) की सांस्कृतिक और पर्यटक राजधानी बनाने के लिए भारत की ओर से दावा पेश किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के निर्देश पर स्मार्ट सिटी ने प्रस्तावना बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
पर्यटन, संस्कृति और हैंडीक्राफ्ट विभाग से मिली जानकारियों को कंपाइल कर स्मार्ट सिटी की ओर से पांच फरवरी को डोजियर मंडलायुक्त को सौंपा जाएगा। इसके बाद यह जानकारी विदेश मंत्रालय को भेजी जाएगी।
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
अधिकारियों के मुताबिक काशी को एससीओ की राजधानी बनाए जाने के बाद यहां पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही विश्व के देशों के बीच अंतर सांस्कृतिक रिश्ते भी मजबूत होंगे। स्मार्ट सिटी के जनसंपर्क अधिकारी शाकंभरी नंदन सोंथालिया के मुताबिक सभी विभागों से मिलने वाली जानकारियों को कंपाइल कर प्रेजेंटेशन के लिए भेजा जाएगा।
विभिन्न धर्मों के लिए विशेष स्थान है काशी
काशी न सिर्फ हिंदू बल्कि मुस्लिम, ईसाई और सिख धर्म के प्रमुख धर्मगुरुओं द्वारा किए गए कार्यों के लिए भी जानी जाती है। यहां भगवान श्रीराम के अलावा पांडवों के पंचक्रोशी परिक्रमा की जानकारी मिलती है। वहीं जैन धर्म के पांच गुरुओं की जन्मस्थली के साथ सारनाथ में भगवान बुद्ध की तपोस्थली है। मुस्लिम धर्म गुरुओं के अलावा सिख धर्मगुरुओं ने भी काशी में धर्म की अलख जगाई है। डोजियर में इन सभी को स्थान दिया गया है।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि वाराणसी में प्रत्येक महीने विशेष आयोजनों की कार्ययोजना बनवाई जा रही है। यहां की देव दीपावली, गंगा महोत्सव, संकट मोचन संगीत समारोह सहित अन्य आयोजनों को भी डोजियर में शामिल किया जा रहा है