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खुले में शौच मुक्त गांव अभियान के नाम पर खूब हुआ 'मिशन लूटखसोट'
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 11 Apr 2017 06:14 PM IST
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सरकारी पैसे से बने शौचालयों में कहीं दीवार नहीं, तो कहीं दरवाजे
- फोटो : अमर उजाला
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत चुने गए गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के नाम पर जमकर लूटखसोट की गई है। सरकारी पैसे से बनवाए गए शौचालयों की स्थिति बता रही है कि ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और नेताओं ने मिलीभगत कर खूब लूटखसोट की। सरकार के लाखों रुपये गड़प कर गए। स्वच्छता का ढिंढोरा केवल सरकारी बैठकों में पीटा जाता रहा।
ब्लॉक स्तर पर पड़ताल में सामने आया कि सरकारी धन से बनवाए गए शौचालयों का केवल ढांचा खड़ा कर दिया गया, जो कि इस्तेमाल लायक नहीं है। कुछ में दरवाजे नहीं है तो किसी की सेप्टिक टैंक खराब है। दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां कागजों पर शौचालयों की संख्या कुछ और है, धरातल पर कुछ और।
दीवार खड़े कर दिए, सेप्टिक टैंक ही नहीं
चोलापुर ब्लॉक के दो ग्राम पंचायतों नियारडीह और मंगोलेपुर का चयन स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत किया गया था। नियारडीह में 450 और मंगोलेपुर में 111 शौचालयों का निर्माण दिखाया गया है। जबकि इतने शौचालय नहीं हैं। कुछ बने भी हैं तो अधूरे। अधिकारियों ने इन गांवों खुले में शौच मुक्त करार दिया है लेकिन अब भी लोग खुले में जाते हैं।
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मंगोलेपुर के ग्राम प्रधान जय प्रकाश सिंह ने बताया कि शौचालयों की स्थिति के बारे में शिकायत की गई थी। कुछ दिन पहले डीपीआरओ ने निरीक्षण भी किया था, उनके स्तर से भी कार्रवाई नहीं की गई। शौचालय इस्तेमाल लायक नहीं हैं।
3.36 करोड़ खर्च, फिर भी गंदगी
बडागांव ब्लॉक की 80 में से 15 ग्राम पंचायतों बौलिया, बलरामपुर, फु लवरिया, एसाईपुर, तालुके, बिरांव, कोइलार, रसुलहां, अकोढ़ा, धनंजयपुर, घमहापुर, रतनपुर, कविरामपुर, तरसड़ा छेड़ापुर, बरहीकला को खुले में शौच मुक्त गांव घोषित किया गया है। इन गांवों में 3.36 करोड़ से लगभग 2800 शौचालय बनवाकर शत प्रतिशत मकानों में शौचालय होने का दावा एडीओ पंचायत एसके दर्वे ने किया है।
हकीकत यह है कि इन गांवों के लोग खुले में जाते हैं। एडीओ पंचायत के मुताबिक अगले चरण में 25 गांवों को खुले में शौच मुक्त गांव बनाने की दिशा में 80 फीसदी कार्य हो चुका है।
दूसरी बार अभियान, फिर भी नाकाम
सेवापुरी ब्लॉक के छह सौ परिवार वाले डोमैला गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 15-16 260 शौचालय बनवाने का लक्ष्य मिला। ग्राम पंचायत अधिकारी श्रीकांत उपाध्याय ने बताया कि अब तक 200 शौचालय ही बन सके हैं।
ग्राम प्रधान मुरारी बिंद ने बताया कि 2012-13 में लोहिया गांव घोषित होने पर गांव में लगभग तीन सौ शौचालय बनवाए गए थे। तमाम ऐसे शौचालय हैं, जिनमें उपले रखे जा रहे हैं।
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ब्लॉक स्तर पर पड़ताल में सामने आया कि सरकारी धन से बनवाए गए शौचालयों का केवल ढांचा खड़ा कर दिया गया, जो कि इस्तेमाल लायक नहीं है। कुछ में दरवाजे नहीं है तो किसी की सेप्टिक टैंक खराब है। दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां कागजों पर शौचालयों की संख्या कुछ और है, धरातल पर कुछ और।
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दीवार खड़े कर दिए, सेप्टिक टैंक ही नहीं
चोलापुर ब्लॉक के दो ग्राम पंचायतों नियारडीह और मंगोलेपुर का चयन स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत किया गया था। नियारडीह में 450 और मंगोलेपुर में 111 शौचालयों का निर्माण दिखाया गया है। जबकि इतने शौचालय नहीं हैं। कुछ बने भी हैं तो अधूरे। अधिकारियों ने इन गांवों खुले में शौच मुक्त करार दिया है लेकिन अब भी लोग खुले में जाते हैं।
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मंगोलेपुर के ग्राम प्रधान जय प्रकाश सिंह ने बताया कि शौचालयों की स्थिति के बारे में शिकायत की गई थी। कुछ दिन पहले डीपीआरओ ने निरीक्षण भी किया था, उनके स्तर से भी कार्रवाई नहीं की गई। शौचालय इस्तेमाल लायक नहीं हैं।
3.36 करोड़ खर्च, फिर भी गंदगी
बडागांव ब्लॉक की 80 में से 15 ग्राम पंचायतों बौलिया, बलरामपुर, फु लवरिया, एसाईपुर, तालुके, बिरांव, कोइलार, रसुलहां, अकोढ़ा, धनंजयपुर, घमहापुर, रतनपुर, कविरामपुर, तरसड़ा छेड़ापुर, बरहीकला को खुले में शौच मुक्त गांव घोषित किया गया है। इन गांवों में 3.36 करोड़ से लगभग 2800 शौचालय बनवाकर शत प्रतिशत मकानों में शौचालय होने का दावा एडीओ पंचायत एसके दर्वे ने किया है।
हकीकत यह है कि इन गांवों के लोग खुले में जाते हैं। एडीओ पंचायत के मुताबिक अगले चरण में 25 गांवों को खुले में शौच मुक्त गांव बनाने की दिशा में 80 फीसदी कार्य हो चुका है।
दूसरी बार अभियान, फिर भी नाकाम
सेवापुरी ब्लॉक के छह सौ परिवार वाले डोमैला गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 15-16 260 शौचालय बनवाने का लक्ष्य मिला। ग्राम पंचायत अधिकारी श्रीकांत उपाध्याय ने बताया कि अब तक 200 शौचालय ही बन सके हैं।
ग्राम प्रधान मुरारी बिंद ने बताया कि 2012-13 में लोहिया गांव घोषित होने पर गांव में लगभग तीन सौ शौचालय बनवाए गए थे। तमाम ऐसे शौचालय हैं, जिनमें उपले रखे जा रहे हैं।
पीएम के आदर्श गांव में अब भी अभियान
स्वच्छ भारत अभियान
धानमंत्री मोदी के सांसद आदर्श ग्राम पंचायत नागेपुर ओडीएफ हो जाने पर अब भी स्वच्छता जागरूकता समिति के लोग यहां अभियान चलाकर जागरूक कर रहे हैं। प्रधान पारसनाथ राजभर का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा गोद लिए जाने के बाद कई एनजीओ का प्रयास रंग लाया। लगभग 500 शौचालय बनवाए गए हैं।
खुद ही पीठ थपथपा रहे साहिबान
आराजी लाइन ब्लॉक के 45 गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए चुना गया। एडीओ पंचायत सुनील सिंह ने 30 गांवों में अभियान को सफल बताया। जबकि इन गांवों की गंदगी से पटी सड़कें, करौती का पोखरा, ब्लॉक से सटे बीरभानपुर की पगडंडियां इनके दावों की पोल खोल रही हैं।
मोहनसराय गांव बना नजीर
आराजी लाइन ब्लॉक के मोहनसराय गांव में सभी 429 परिवार में शौचालय है। सभी लोग शौचालय में जाते हैं। गत 24 अप्रैल को गांव को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया। हां, जीटी रोड से सटा होने के कारण बाहरी लोग गांव की सूरत बिगाड़ रहे हैं। ट्रक चालक खुले में बैठ जाते हैं। इसके लिए भी गांव में सामुदायिक शौचालय बनवाने की स्वीकृति मिल गई है।
खुद ही पीठ थपथपा रहे साहिबान
आराजी लाइन ब्लॉक के 45 गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए चुना गया। एडीओ पंचायत सुनील सिंह ने 30 गांवों में अभियान को सफल बताया। जबकि इन गांवों की गंदगी से पटी सड़कें, करौती का पोखरा, ब्लॉक से सटे बीरभानपुर की पगडंडियां इनके दावों की पोल खोल रही हैं।
मोहनसराय गांव बना नजीर
आराजी लाइन ब्लॉक के मोहनसराय गांव में सभी 429 परिवार में शौचालय है। सभी लोग शौचालय में जाते हैं। गत 24 अप्रैल को गांव को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया। हां, जीटी रोड से सटा होने के कारण बाहरी लोग गांव की सूरत बिगाड़ रहे हैं। ट्रक चालक खुले में बैठ जाते हैं। इसके लिए भी गांव में सामुदायिक शौचालय बनवाने की स्वीकृति मिल गई है।