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कालीन नगरी में भी हैं नीरव मोदी जैसे बैंकों के कई बड़े कर्जदार

Wed, 21 Feb 2018 03:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,भदोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,भदोही Updated Wed, 21 Feb 2018 03:30 PM IST
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there are so many nirav modi in carpet city
उद्यमियों, कारोबारियों और निर्यातकों की संख्या सबसे ज्यादा
कालीन उद्योग के जरिये देश में अपनी अलग पहचान रखने वाले यूपी के भदोही जिले में भी कई ‘नीरव मोदी’ दबे पांव बैंकों को चूना लगा रहे हैं। विभिन्न बैंकों से करीब सवा अरब रुपये लोन लेकर नहीं चुकाने वाले 11 हजार डिफॉल्टर चिह्नित किए गए हैं। इन्हें इन्हें बैंकों से आरसी भी जारी की जा चुकी है।
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इनमें पंजाब नेशनल बैंक के 800, यूबीआई के 2000 समेत अन्य बैंकों से कर्ज लेने वाले हजारों लोग शामिल हैं। इनमें कई निर्यातक और कारोबारी 50 से 60 करोड़ रुपये तक के कर्जदार हैं।
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मोटे कमीशन के चक्कर में सारा खेल बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से खेला जा रहा है। कर्ज लेने वाले 50 से 60 फीसदी व्यापारी समय पर बैंकों को पैसा लौटा देते हैं लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भी व्यापारी, निर्यातक और अन्य कर्जदार हैं, जो बैंक के अफसरों से सेटिंग कर बकाया रकम जमा ही नहीं करते। दो से तीन साल के बाद उनके खातों को एनपीए यानी डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है।
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बैंकों से सेटिंग के दम पर भदोही जिले में 11 हजार डिफॉल्टरों पर 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी है। यूबीआई, पीएनबी, एसबीआई समेत अन्य बैंकों के करीब चार हजार डिफॉल्टरों ने 100 करोड़ रुपये जमा नहीं किया।

वहीं, सहकारी बैंकों के सात हजार डिफॉल्टर 25 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार 15 निर्यातक और पांच कारोबारियों ने ही 50 करोड़ से अधिक का बकाया नहीं जमा किया। 

कमीशन से चलता है बेईमानी का खेल

there are so many nirav modi in carpet city
125 करोड़ दबाए बैठे हैं 11 हजार डिफॉल्टर

पीएनबी के मैनेजर पंकज कुमार ने कहा कि बैंक के 800 डिफॉल्टरों पर चार करोड़ रुपये बकाया है। सभी को आरसी भेजी गई। पैसा न जमा करने पर इनकी संपत्ति जब्त की जाएगी। उन्होंने बताया कि पीएनबी के सबसे बड़े डिफॉल्टर अंबा कंस्ट्रक्शन और गोपीगंज की एक शिक्षण संस्था है। इन पर 10 से 15 लाख की बकाएदारी है। यूबीआई के एलडीएम अमिताभ सेन के मुताबिक दो हजार डिफॉल्टरों ने 34 करोड़ का बकाया नहीं जमा किया।

 बैंकों से कर्ज लेकर न जमा करने का खेल के पीछे कमीशन की मोटी रकम है। जो अधिक कमीशन देता है, उसको बिना जांच-पड़ताल के लाखों रुपये का कर्ज बैकों से दे दिया जाता है। ज्ञानपुर के कई बैंक अफसरों से लेकर कर्मचारियों की शान-ओ-शौकत और बड़े-बड़े महल देखकर उनकी काली कमाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। 30 हजार रुपये तक वेतन वाले कई कर्मचारियों का देखते ही देखते करोड़ों का एंपायर खड़ा हो गया है। 
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