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...तब महामना खुद देते थे उपाधियां

Fri, 14 Oct 2016 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 14 Oct 2016 02:21 AM IST
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... Then gave themselves high-minded titles
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के गौरवशाली अतीत में दीक्षांत समारोह का भव्य अध्याय भी जुड़ा है। स्थापना के तीन साल बाद पहली बार हुए दीक्षांत समारोह के आकर्षण खुद महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ही रहे। उस वक्त महामना एक-एक स्नातक को अपने हाथों से उपाधि देते थे। स्नातकों के लिए यह पल स्वर्णिम होता था। वर्तमान तक बीएचयू के दीक्षांत समारोह ने एक नया कीर्तिमान गढ़ा है।
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पहला दीक्षांत समारोह 1919 में हुआ था। महामना की मौजूदगी में उस वक्त मैसूर के राजा, जो विश्वविद्यालय के चांसलर भी थे, ने स्नातकों को डिग्री बांटीं। पहले दीक्षांत समारोह में 34 स्नातकों को डिग्री दी गई। इसके बाद महामना ने जब कुलपति का पद संभाला, दीक्षांत की गरिमा जैसे और बढ़ गई। बीएचयू के एकेडेमिक स्टाफ कॉलेज के प्राध्यापक रहे डॉ. कृष्णदेव उपाध्याय ने लिखा है महामना उपाधि प्रदान करने के साथ-साथ स्नातकों को उच्च आदर्शों की रक्षा करने, तन मन धन से राष्ट्र की सेवा करने और विश्व शांति की स्थापना की प्रतिज्ञा दिलाते थे। यह परंपरा आज तक कायम है।
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विश्वविद्यालय के इतिहास ऐसा पहली बार 2013 में हुआ कि आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह के स्नातकों ने गुलामी का गाउन छोड़ पारंपरिक वेशभूषा में उपाधि ग्रहण की।
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आईटी से आईआईटी बने बीएचयू के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने पारंपरिकता को तरजीह दी। आईआईटी के इस पहले दीक्षांत समारोह में तीन साल के स्नातकों ने धोती-कुर्ता, साड़ी व सलवार सूट में उपाधि ली। पहले दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि रहे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी थोड़े अचरज और दिल से उनकी इस परंपरा को सलाम किया। इसी के बाद संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने इन नई परंपरा का अनुसरण किया। दो साल पहले काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने भी गाउन छोड़ दीक्षांत के इस पारंपरिक परिधान को अपनाया।



बीएचयू के दीक्षांत समारोह का खास तथ्य एक ये भी है कि पहले हर संकाय, हर विभाग का दीक्षांत समारोह अलग अलग हुआ करता था। स्थापना के कुछ साल तक महामना के संयोजन में जब तक दीक्षांत समारोह हुए, एक साथ स्नातकों को उपाधि वितरित की गईा। जैसे जैसे साल गुजरे, विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी, संकाय और विभागों को विस्तार हुआ। सभी संकायों, विभागों का दीक्षांत समारोह अलग अलग होने लगा। ये परंपरा 2004 तक चली। 2005 में जब प्रो. पंजाब सिंह बीएचयू के कुलपति बने, उन्होंने सामूहिक दीक्षांत समारोह की शुरुआत कराई और उसके मुख्य अतिथि राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रहे। इसके बाद दीक्षांत समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, मानव संसाधन विकास मंत्री रहे कपिल सिब्बल, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, स्पीकर रहीं मीरा कुमार समेत कई दिग्गजों ने बीएचयू के दीक्षांत समारोह को सुशोभित किया। बीएचयू के शताब्दी वर्ष पर इस साल 22 फरवरी को हुए 98वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों मेधावियों को गोल्ड मेडल पाने का सुनहरा अवसर मिला।
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