जयंती: बनारस घराने की नायाब हीरा थीं सितारा देवी, 16 साल की उम्र में टैगोर ने दिया था कथक क्वीन का खिताब
कथक साम्राज्ञी सितारा देवी की आज 101वीं जयंती है। बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला।
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कथक साम्राज्ञी की बेटी जयंतीमाला मिश्रा ने बताया कि कथक साम्राज्ञी सितारा देवी को मात्र 16 साल की उम्र में ही गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने उनका नृत्य देखकर उन्हें कथक क्वीन के खिताब से नवाजा था। आज से सौ साल पहले जब कोई यह सोच नहीं सकता था कि एक शरीफ घराने की लड़की नाच-गाना सीखे।
तब उस दौर में नाना आचार्य सुखदेव ने पहली बार परिवार की परंपरा तोड़ी। किसी रूढ़ि को तोड़कर कला साधना में लीन होने का इनाम उन्हें बिरादरी के बहिष्कार के रूप में मिला। बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला। कला के क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए उन्होंने स्टेज शो करने का विचार किया और सन 1952 के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो पहली ऐसी नृत्यांगना थीं जो उस दौर में लंदन गईं।
लगातार 12 घंटे नृत्य
उन्होंने देश-विदेश में ढेर सारे शो किए और कथक को एक अलग पहचान दिलाई। मुंबई के बिरला मातोश्री हॉल में बनाया गया रिकार्ड उनके जीवन की बेहतरीन पूंजी थी। उन्होंने वहां लगातार 12 घंटे नृत्य किया था।
वहीं उनके शिष्य व नाती विशाल कृष्णा ने बताया कि धन्नो से सितारा देवी बनने की कहानी के पीछे उनकी तपस्या, त्याग, समर्पण और गुस्सा भी था। चीन और रूस जैसे देशों से उन्हें नागरिकता का आमंत्रण भी मिला लेकिन उनको भारत और अपनी काशी से जो लगाव था उसने उन्हें कहीं नहीं जाने दिया।
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