गाजीपुर के आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या में वांछित इनामी बदमाश गिरफ्तार, एसटीएफ ने वाराणसी से दबोचा
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गाजीपुर के करंडा थाना के ब्राह्मणनपुरा गांव के आरएसएस कार्यकर्ता राजेश मिश्रा की हत्या में वांछित 25 हजार के इनामी बदमाश बलवंत कुमार उर्फ पंकज को मंगलवार को एसटीएफ ने सिगरा स्टेडियम के समीप से गिरफ्तार किया। गाजीपुर के टॉप-10 बदमाशों में शुमार बलवंत पुलिस मुठभेड़ में मारे गए राजेश दूबे उर्फ टुन्ना के गिरोह का सदस्य है और करंडा थाना के मैनपुर गांव का रहने वाला है।
बलवंत के पास से एक तमंचा, दो कारतूस, दो मोबाइल और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद कर उसे सिगरा थाने की पुलिस को सौंप दिया गया। 21 अक्तूबर 2017 को राजेश दूबे उर्फ टुन्ना ने अपने साथियों के साथ आरएसएस कार्यकर्ता राजेश मिश्रा की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। हमले में राजेश के एक भाई घायल भी हुए थे।
एसटीएफ की वाराणसी इकाई के डिप्टी एसपी विनोद सिंह के अनुसार, जानकारी मिली कि राजेश मिश्रा की हत्या में वांछित बलवंत सिगरा स्टेडियम के पास किसी से मिलने आया है। सूचना के आधार पर निरीक्षक अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में बैजनाथ राम, अवनीश सिंह, धनंजय श्रीवास्तव, कमांडो दिलीप की टीम ने बलवंत को गिरफ्तार कर लिया। बलवंत के खिलाफ गाजीपुर, वाराणसी और प्रयागराज में हत्या जैसे गंभीर आरोपों में आठ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।
जेल में हुई थी टुन्ना से मुलाकात
बलवंत ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2016 में गांव के ही एक लड़के से विवाद हो गया था। उसने गोली चलाई, लेकिन लड़का बच गया था। इस मामले में वह समर्पण कर जेल चला गया। जेल में उसकी मुलाकात राजेश दूबे उर्फ टुन्ना से हुई, जिसके साथ मिलकर वह अपराध करने लगा। इसके कुछ दिनों बाद ही वह अपने साथी प्रदीप मिश्रा और टुन्ना के भाई आनंद दूबे के साथ जा रहा था।
इसी दौरान करंडा थाने की पुलिस के मुठभेड़ हो गई। आनंद दूबे भाग गया और बाकी लोग पकड़े गए। जेल में निरुद्ध टुन्ना ने फरार होने की योजना बनाई। जेल से जमानत पर छूटने के बाद योजना के अनुसार न्यायालय में पेशी के समय 29 अगस्त 2017 को पुलिस अभिरक्षा से टुन्ना को छुड़ा ले गए।
इसके बाद राजेश मिश्रा के विरोधी प्रदीप मिश्रा के कहने पर उनकी हत्या की गई। 17 जून 2019 को प्रयागराज के झूंसी थाना के चक हरिहरवन चौराहा के पास पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव और उनके भाई राजकुमार पर फायरिंग की। इस हमले में अशोक यादव का गनर घायल हो गया था और वह बच गए थे। अशोक यादव की हत्या के लिए 50 हजार रुपये एडवांस मिले थे।