{"_id":"63fb5fbf1804ad98fe010fe4","slug":"the-relationship-between-kashi-and-vadnagar-will-be-explored-varanasi-news-c-20-vns1013-80766-2023-02-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: काशी और वडनगर के बीच के संबंधों की होगी खोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: काशी और वडनगर के बीच के संबंधों की होगी खोज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीएम के गृहनगर और संसदीय क्षेत्र के संबंध तलाशेंगे बीएचयू के विशेषज्ञ
02 हजार साल पहले बौद्धभिक्षुओं ने की थी वडनगर की यात्रा
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहनगर वडनगर और संसदीय क्षेत्र काशी के प्राचीन संबंधों की तलाश नए सिरे से होगी। बीएचयू के विशेषज्ञों की टीम इतिहास, संस्कृति और पलायन को केंद्र में रखकर पांचवीं शताब्दी के रहस्यों से पर्दा उठाएंगे। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और गुजरात संस्कृति विभाग के साथ बीएचयू ने इस खोज के लिए एक समझौता किया है।
समझौते के बाद इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम तैयार की गई जो गुजरात जाकर काशी और वडनगर के संबंधों के पुख्ता प्रमाण खोजेगी। बीएचयू ने समझौते के बाद प्रो. मुकुलराज मेहता के नेतृत्व में शोध टीम गठित कर दी है। शोध टीम में प्रो. विदुला जायसवाल, प्रो. अतुल कुमार त्रिपाठी और प्रो. लालजी को शामिल किया गया है। शोध के दौरान विज्ञान, कला और वास्तु के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
प्रो. अतुल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वडनगर की खोदाई के बाद यह पता चला कि 15 सौ साल पहले यह क्षेत्र बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र था। कई विदेशी यात्रियों ने भी अपने लेखों में वडनगर का जिक्र किया है। काशी और वडनगर के संबंधों से इन्कार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वहां पर खोदाई में कई स्तूप भी मिले थे। मथुरा के संग्रहालय में वडनगर से जुड़े पुरातात्विक प्रमाण रखे गए हैं। टीम के सदस्यों का कहना है कि काशी ने वडनगर को ज्ञान और कला के केंद्र के रूप में स्थापित किया। करीब डेढ़ से 2 हजार साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ से वडनगर की यात्रा की थी। बौद्धभिक्षु काशी से मथुरा, सांची होते हुए वडनगर पहुंचे। इन दोनों ही स्थानों पर वडनगर से जुड़े प्रमाण हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
02 हजार साल पहले बौद्धभिक्षुओं ने की थी वडनगर की यात्रा
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहनगर वडनगर और संसदीय क्षेत्र काशी के प्राचीन संबंधों की तलाश नए सिरे से होगी। बीएचयू के विशेषज्ञों की टीम इतिहास, संस्कृति और पलायन को केंद्र में रखकर पांचवीं शताब्दी के रहस्यों से पर्दा उठाएंगे। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और गुजरात संस्कृति विभाग के साथ बीएचयू ने इस खोज के लिए एक समझौता किया है।
समझौते के बाद इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम तैयार की गई जो गुजरात जाकर काशी और वडनगर के संबंधों के पुख्ता प्रमाण खोजेगी। बीएचयू ने समझौते के बाद प्रो. मुकुलराज मेहता के नेतृत्व में शोध टीम गठित कर दी है। शोध टीम में प्रो. विदुला जायसवाल, प्रो. अतुल कुमार त्रिपाठी और प्रो. लालजी को शामिल किया गया है। शोध के दौरान विज्ञान, कला और वास्तु के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
प्रो. अतुल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वडनगर की खोदाई के बाद यह पता चला कि 15 सौ साल पहले यह क्षेत्र बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र था। कई विदेशी यात्रियों ने भी अपने लेखों में वडनगर का जिक्र किया है। काशी और वडनगर के संबंधों से इन्कार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वहां पर खोदाई में कई स्तूप भी मिले थे। मथुरा के संग्रहालय में वडनगर से जुड़े पुरातात्विक प्रमाण रखे गए हैं। टीम के सदस्यों का कहना है कि काशी ने वडनगर को ज्ञान और कला के केंद्र के रूप में स्थापित किया। करीब डेढ़ से 2 हजार साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ से वडनगर की यात्रा की थी। बौद्धभिक्षु काशी से मथुरा, सांची होते हुए वडनगर पहुंचे। इन दोनों ही स्थानों पर वडनगर से जुड़े प्रमाण हैं।
विज्ञापन