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अब गंगा की मौजों पर तैरता प्लेटफाॅर्म
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 24 Nov 2016 01:57 AM IST
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गंगा के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी
- फोटो : अमर उजाला
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काशी में गंगा घाट जल्द ही नए कलेवर में दिखने लगेंगे। आधुनिकता के साथ परंपरा को सहेजते हुए घाटों को सुंदर बनाने का काम शुरू हो चुका है। सब कुछ समय पर हुआ तो दिसंबर तक काम पूरा हो जाएगा। तीन करोड़ से अधिक की लागत से घाटों पर छतरी, चेंजिंग रूम, फ्लोटिंग जेट्टी (तैरता हुआ प्लेटफॉर्म) समेत कई योजनाएं मूर्त रूप लेने लगी हैं।
केंद्र की मेगा डेस्टीनेशन योजना के तहत काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 3.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कई घाटों पर काम भी शुरू हो चुका है। इस योजना केतहत अस्सी से राजघाट तक 11 बिंदुओं पर काम होना है। राजेंद्र प्रसाद घाट और दशाश्वमेध घाट पर फ्लोटिंग जेटिस लगाई जाएगी जो पानी पर तैरती रहेगी। गंगा स्नान करने वालों को अब नाव का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
बाढ़ में भी वह पानी पर उठती जाएगी। यहां रेलिंग भी होगी ताकि लोग सुरक्षित ढंग से स्नान कर सकें। अधिशासी अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि इसके अलावा 11 थ्री सीटर यूरिनल बनाए जाएंगे। घाटों पर चुनार के पत्थरों से बने 60 तख्त लगाए जाएंगे। इसके अलावा छोटे शाइनेज लगाए जा रहे हैं जिस पर हिंदी के अलावा अंग्रेजी, जापानी और रशियन भाषा में घाटों के नाम होंगे। चार बड़े शाइनेज भी लगाए जाने हैं। बांस-बल्ली की 25 छतरियां लगाई जाएंगी। डस्टबीन, वाटर कूलर भी लगेंगे।
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केंद्र की मेगा डेस्टीनेशन योजना के तहत काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 3.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कई घाटों पर काम भी शुरू हो चुका है। इस योजना केतहत अस्सी से राजघाट तक 11 बिंदुओं पर काम होना है। राजेंद्र प्रसाद घाट और दशाश्वमेध घाट पर फ्लोटिंग जेटिस लगाई जाएगी जो पानी पर तैरती रहेगी। गंगा स्नान करने वालों को अब नाव का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
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बाढ़ में भी वह पानी पर उठती जाएगी। यहां रेलिंग भी होगी ताकि लोग सुरक्षित ढंग से स्नान कर सकें। अधिशासी अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि इसके अलावा 11 थ्री सीटर यूरिनल बनाए जाएंगे। घाटों पर चुनार के पत्थरों से बने 60 तख्त लगाए जाएंगे। इसके अलावा छोटे शाइनेज लगाए जा रहे हैं जिस पर हिंदी के अलावा अंग्रेजी, जापानी और रशियन भाषा में घाटों के नाम होंगे। चार बड़े शाइनेज भी लगाए जाने हैं। बांस-बल्ली की 25 छतरियां लगाई जाएंगी। डस्टबीन, वाटर कूलर भी लगेंगे।
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