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जांबाज जवानों ने बिखेरी सुरों की सुगंध
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 18 May 2017 02:05 AM IST
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पुलिस इंस्पेक्टर गोपाल सिंह
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सरहद से लेकर नागरिकों तक की सुरक्षा में हर वक्त मुस्तैद रहने वाले जवानों ने बुध्ावार की रात गंगा तट पर सुरों की खुशबू बिखेरी तो हर कोई झूम उठा। हथियार संभालने वाले हाथों ने जब माइक थामा तो माहौल में देश्ाभक्ति की मिठास घुलती चली गई। चिकित्सक भी सुर से सुर मिलाने में पीछे नही रहे। अवसर था, सुरगंगा महोत्सव का।
मौसम खराब होने के चलते सुरगंगा कार्यक्रम निर्धारित समय से पौन घंटा देरी से शुरू हुआ। बूंदाबांदी से बिजली के तारों को बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर करने के बाद कार्यक्रम पूरे जोश के साथ शुरू हुआ। एनडीआरएफ, सेना, सीआरपीएफ, 39 जीटीसी के जवानों ने देशभक्ति गीतों से समां बांध दिया। यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क, नगर निगम और सामाजिक संस्था पहल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सुरगंगा संगीत महोत्सव की 30 वीं निशा शहीद राजगुरु और सुखदेव के नाम समर्पित रही। बुधवार को टाउनहाल में आयोजित कार्यक्रम में 39 जीटीसी की आर्मी बैंड ने सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा गीत पेश कर सभी को रोमांचित कर दिया। पुलिस इंस्पेक्टर गोपाल सिंह ने देशभक्ति गीत पेश किया। सीआरपीएफ के अजीत कुमार सिंह, सीआरपीएफ की 95 वीं बटालियन के नीलेश पांडेय, दिलीप कुमार, कुलदीप सिंह ने गीत प्रस्तुत किया।
हाथों में तिरगंा लहराते युवाओं ने भी हौसला बढ़ाया। सबसे खास प्रस्तुति 39 जीटीसी के सिम्फनी की रही। उनके पाइप एवं मिलिट्री बैंड की धुनों पर सब झूमते दिखे। जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, ऐ वतन हमको तेरी कसम, रंग दे बसंती चोला, सारे जहां से अच्छा आदि गीतों पर झूम उठे। समूह में ड्रम, बैगपाइपर, पाइप, वुडवीन, ब्रास की जुगलबंदी रही। सूबेदार रामकृष्ण के संचालन में 35 जवानों ने प्रस्तुति दी। पुलिस के जवानों ने लोकगीत प्रस्तुत किए। इनके बाद डाक्टरों की बारी आई तो डा. अशोक सिंह ने चौदहवीं का चांद पेश किया। प्रो. संजीव कुमार सिंह ने चांदी जैसा रंग है तेरा, बीएचयू की डा. अपूर्वा शुक्ल मैं हूं दीवाना, डा. ऋषिला मजूमदार, प्रो. श्रीकांत भारती ने अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 39 जीटीसी के बिग्रेडियर एसए रहमान रहे। उनका स्वागत पहल संस्था के सदस्य हरिदास पारिख ने किया। सौरभ मिश्र ने सुरगंगा का थीम सांग पेश किया। संचालन अरविंद मिश्र, जगदीश्वरी चौबे, अपूर्वा श्रीवास्तव, प्रिंस आदि ने किया।
मौसम खराब होने के चलते सुरगंगा कार्यक्रम निर्धारित समय से पौन घंटा देरी से शुरू हुआ। बूंदाबांदी से बिजली के तारों को बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर करने के बाद कार्यक्रम पूरे जोश के साथ शुरू हुआ। एनडीआरएफ, सेना, सीआरपीएफ, 39 जीटीसी के जवानों ने देशभक्ति गीतों से समां बांध दिया। यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क, नगर निगम और सामाजिक संस्था पहल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सुरगंगा संगीत महोत्सव की 30 वीं निशा शहीद राजगुरु और सुखदेव के नाम समर्पित रही। बुधवार को टाउनहाल में आयोजित कार्यक्रम में 39 जीटीसी की आर्मी बैंड ने सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा गीत पेश कर सभी को रोमांचित कर दिया। पुलिस इंस्पेक्टर गोपाल सिंह ने देशभक्ति गीत पेश किया। सीआरपीएफ के अजीत कुमार सिंह, सीआरपीएफ की 95 वीं बटालियन के नीलेश पांडेय, दिलीप कुमार, कुलदीप सिंह ने गीत प्रस्तुत किया।
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हाथों में तिरगंा लहराते युवाओं ने भी हौसला बढ़ाया। सबसे खास प्रस्तुति 39 जीटीसी के सिम्फनी की रही। उनके पाइप एवं मिलिट्री बैंड की धुनों पर सब झूमते दिखे। जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, ऐ वतन हमको तेरी कसम, रंग दे बसंती चोला, सारे जहां से अच्छा आदि गीतों पर झूम उठे। समूह में ड्रम, बैगपाइपर, पाइप, वुडवीन, ब्रास की जुगलबंदी रही। सूबेदार रामकृष्ण के संचालन में 35 जवानों ने प्रस्तुति दी। पुलिस के जवानों ने लोकगीत प्रस्तुत किए। इनके बाद डाक्टरों की बारी आई तो डा. अशोक सिंह ने चौदहवीं का चांद पेश किया। प्रो. संजीव कुमार सिंह ने चांदी जैसा रंग है तेरा, बीएचयू की डा. अपूर्वा शुक्ल मैं हूं दीवाना, डा. ऋषिला मजूमदार, प्रो. श्रीकांत भारती ने अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 39 जीटीसी के बिग्रेडियर एसए रहमान रहे। उनका स्वागत पहल संस्था के सदस्य हरिदास पारिख ने किया। सौरभ मिश्र ने सुरगंगा का थीम सांग पेश किया। संचालन अरविंद मिश्र, जगदीश्वरी चौबे, अपूर्वा श्रीवास्तव, प्रिंस आदि ने किया।
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