UP: नाबालिग से दुष्कर्म, बाल अपचारी को 20 साल की सजा, कांग्रेस नेता राहुल केस में सुनवाई पूरी; जानें मामले
Varanasi News: अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बाल अपचारी को 20 साल कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं राहुल गांधी के सिख समुदाय पर दिए बयान मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा। दूसरी ओर बनारस क्लब भूमि विवाद मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई तय हुई है।
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Varanasi News: विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय की अदालत ने शनिवार को नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में बाल अपचारी को दोषी करार दिया। अदालत ने बाल अपचारी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
अदालत ने जुर्माने की आधी धनराशि दुष्कर्म पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है। यह आदेश 28 महीने में आया है। अभियोजन के मुताबिक, नाबालिग की मां ने जैतपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसका आरोप था कि 23 जनवरी 2024 को सुबह करीब 3 बजे उसकी 15 वर्षीय बेटी को पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति का नाबालिग साला अपने साथ बहला-फुसलाकर भगा ले गया।
पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपी को हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह भेज दिया। नाबालिग लड़की भी मिल गई। मेडिकल परीक्षण में नाबालिग के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी मामले में सुनवाई पूरी, आदेश सुरक्षित
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की तरफ से अमेरिका में सिख समुदाय पर दिए गए बयान मामले में शनिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। विशेष सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली।
मामले में 6 जून को आदेश आ सकता है। अमेरिका दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिख समुदाय पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत में सिख समुदाय को आजादी नहीं है। इस मामले में तिलमापुर सारनाथ निवासी समाजसेवी नागेश्वर मिश्रा ने वाद दाखिल किया था। उनका आरोप था कि राहुल गांधी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे भारत की शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है।
इस मामले की सुनवाई पहले अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ की अदालत में हुई थी। अदालत ने वाद खारिज कर दिया था। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत में निगरानी याचिका दायर कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से राहुल गांधी को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनके अधिवक्ता उपस्थित नहीं हो सके। इसके बाद अदालत ने नोटिस को तामील मानते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी।
बनारस क्लब मामले में अब पांच जुलाई को होगी सुनवाई
विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) सुधाकर राय की अदालत में शनिवार को द बनारस क्लब लिमिटेड से जुड़े भूमि विवाद मामले की सुनवाई हुई। बनारस क्लब के अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता जितेंद्र कुमार तिवारी की तरफ से दाखिल प्रार्थना-पत्र की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों और साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद ही मामले की पोषणीयता पर विस्तृत कानूनी बहस की जा सकती है।
आरोप पूरी तरह निराधार हैं। प्रार्थना-पत्र के साथ कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिए गए हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तिथि 5 जुलाई 2026 तय की है। याचिकाकर्ता जितेंद्र कुमार तिवारी ने द बनारस क्लब लिमिटेड के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा है कि ग्राम पहड़पुर स्थित आराजी नंबर 211 और पुलिस कार्यालय के पास की आराजी नंबर 850 की जमीन पर बनारस क्लब ने अवैध कब्जा कर रखा है।