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श्रद्धालुओं पर छाया गुरुद्वारे में पंगत और संगत का उल्लास

Sun, 09 Jan 2022 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 11:57 PM IST
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The gaiety of Pangat and Sangat in the shadow gurudwara on the devotees
साचु कहों सुन लेहु सभै, जिन प्रेम कियो तिनही प्रभु पायो। मैं हूं परम पुरख को दासा, देखन आयो जगत तमाशा... के शबद कीर्तन के स्वर गुरुद्वारों में देर रात तक गूंजते रहे। सिख धर्मरक्षक, सर्वस्वदानी दशमेश गुरु गुरुगोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर घरों से लेकर गुरुद्वारे तक जश्न का माहौल नजर आया। रविवार को गुरुद्वारे में पंगत और संगत का उल्लास देखने को मिला।
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रविवार को गुरुद्वारा गुरुबाग एक ओंकार सतनाम..., वाहो-वाहो गोविंद सिंह..., वाहि गुरु वाहि गुरु, बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारे से गूंज उठा। सिख समुदाय के लोगों ने गुरु के प्रकाशपर्व पर एक दूसरे को बधाईयां दीं और पकवानों का स्वाद भी चखा। गुरु गोविंद सिंह महाराज के 355 वें प्रकाशोत्सव की शुरुआत भोर में बड़ीसंगत नीचीबाग में गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश से हुई। फूलों से सजी पालकी में गुरु ग्रंथ साहिब की परिक्रमा में गुरु प्रेमियों ने हिस्सा लिया एवं शबद कीर्तन गायन कर गुुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश हुआ। प्रात: 4:15 से पांच बजे तक नाम सिमरन और आठ बजे तक शबद कीर्तन हुआ। रात्रि में कोरोना कर्फ्यू के कारण शबद कीर्तन के आयोजन का प्रसारण वर्चुअल किया गया।
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गुरुबाग में सजी पंगत और संगत
गुरुद्वारा गुरुबाग में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गुरु के प्रकाशोत्सव पर पंगत और संगत की रंगत निखर उठी। कीर्तन दीवान सजा। एक तरफ कथा की संगत सजी तो दूसरी तरफ लंगर की पंगत। गुरु के अटूट लंगर का प्रसाद पंगत में बैठकर श्रद्धालुओं ने बरताया। हजूरी रागी जत्था भाई नरेंद्र सिंह, भाई रकम सिंह, भाई रंजीत सिंह ने कथा से संगत को निहाल किया। मुख्य ग्रंथी भाई रंजीत सिंह ने दीवान समाप्ति अरदास की।
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श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
बड़ी संगत नीचीबाग में शाम को 7 से रात्रि 12 बजे तक दीवान सजा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु के दर पर मत्था टेका। गुरुद्वारे की भव्य सजावट भी हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। कोलकाता से मंगाए गए फूल और रंगबिरंगी झालरों की रौशनी से पूरा गुरुद्वारा अपनी आभा से दमकता रहा।
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