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गुफा में विराजे दुर्ग विनायक, जय गणेश से गूंजा मंदिर
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भगवान दुर्ग विनायक की जलविहार झांकी और वार्षिक शृंगार में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। 20 मीटर लंबी गुफा से गुजरकर श्रद्धालुओं ने दुर्ग विनायक के दर्शन किए। कोरोना के कारण दो साल से सांकेतिक स्वरूप में निभाई जा रही शृंगार व जलविहार की परंपरा को बुधवार को भव्य स्वरूप में आयोजित किया गया।
ज्येष्ठ मास की कृष्णपक्ष नवमी पर बुधवार को दो सालों के बाद भगवान दुर्ग विनायक का हरियाली शृंगार और वार्षिक जल विहार महोत्सव संपन्न हुआ। भगवान शिव की काशी दुर्ग के प्रधान रक्षक की भूमिका निभाने वाले भगवान दुर्ग विनायक के गर्भगृह को गंगा जल से भरा गया। जल में में विभिन्न प्रकार के जलीय पुष्प और पत्तियां सजाई गईं। मंदिर के महंत पं. ज्ञानेश्वर दुबे के आचार्यत्व में ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती के बाद भगवान की झांकी के दर्शन भक्तों के लिए आरंभ हो गए। संपूर्ण मंदिर को अशोक और कामिनी की पत्तियों तथा विविध प्रकार के फूलों से सजाया गया था।
भगवान दुर्ग विनायक की वार्षिक जल विहार झांकी के दर्शन के लिए भक्त हरी पत्तियों से तैयार गुफा से होकर गुजरे। मंदिर गर्भगृह के बाहर के हिस्से को भी गुफा में तब्दील किया गया था। दुर्ग विनायक मंदिर के व्यवस्थापक पं. तारकेश्वर दुबे ने बताया कि इस अवसर पर भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मध्याह्न भोग आरती में भगवान दुर्ग विनायक को पूड़ी सब्जी और बुनिया का भोग लगाकर उसका वितरण भंडारा में किया गया। शाम को सात बजे भगवान को घी और कपूर के दीपकों से विराट आरती उतारी गई।
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ज्येष्ठ मास की कृष्णपक्ष नवमी पर बुधवार को दो सालों के बाद भगवान दुर्ग विनायक का हरियाली शृंगार और वार्षिक जल विहार महोत्सव संपन्न हुआ। भगवान शिव की काशी दुर्ग के प्रधान रक्षक की भूमिका निभाने वाले भगवान दुर्ग विनायक के गर्भगृह को गंगा जल से भरा गया। जल में में विभिन्न प्रकार के जलीय पुष्प और पत्तियां सजाई गईं। मंदिर के महंत पं. ज्ञानेश्वर दुबे के आचार्यत्व में ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती के बाद भगवान की झांकी के दर्शन भक्तों के लिए आरंभ हो गए। संपूर्ण मंदिर को अशोक और कामिनी की पत्तियों तथा विविध प्रकार के फूलों से सजाया गया था।
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भगवान दुर्ग विनायक की वार्षिक जल विहार झांकी के दर्शन के लिए भक्त हरी पत्तियों से तैयार गुफा से होकर गुजरे। मंदिर गर्भगृह के बाहर के हिस्से को भी गुफा में तब्दील किया गया था। दुर्ग विनायक मंदिर के व्यवस्थापक पं. तारकेश्वर दुबे ने बताया कि इस अवसर पर भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मध्याह्न भोग आरती में भगवान दुर्ग विनायक को पूड़ी सब्जी और बुनिया का भोग लगाकर उसका वितरण भंडारा में किया गया। शाम को सात बजे भगवान को घी और कपूर के दीपकों से विराट आरती उतारी गई।
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