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कई गांवों तक फैली आंदोलन की आग

Thu, 14 Apr 2016 01:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 14 Apr 2016 01:48 AM IST
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The fire spread to several villages of movement
आवाज बुलंद करते प्रभावित गांवों के किसान।
 रिंगरोड के प्रभावित किसानों के मुआवजे के मसले ने और तूल पकड़ लिया है। आंदोलन की आग कई गांवों तक फैल गई है। हृदयपुर के साथ ही अब अहमदपुर में आसपास के कई गांवों के किसान अनशन पर बैठ गए हैं। इस बीच, आंदोलन के पांचवें दिन बुधवार को भी रिंग रोड का काम शुरू नहीं हो पाया। प्रभावित सैकड़ों किसान परिवारों ने पूरी एकजुटता से अपने हक की आवाज उठाई। नए सर्किल रेट के आधार पर मुआवजे की मांग पर अड़े इन किसानों ने दो टूक कहा कि वे अपने हक के लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। वे विकास विरोध नहीं हैं लेकिन अपने साथ नाइंसाफी भी बरदाश्त नहीं करेंगे।
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संदहा से हरहुआ तक रिंग रोड के निर्माण में जिन किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई है, वे नए सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा न मिलने से आंदोलित हैं। हृदयपुर में अनशन जारी रहने के साथ ही अहमदपुर में भी किसान क्रमिक धरने पर बैठ गए और अपने हक के लिए आर-पार के संघर्ष का एलान किया। यहां क्रमिक अनशन के पहले दिन राम निहोर पटेल और होरीलाल पाल को माला पहनाकर किसानों ने अनशन पर बैठाया। इस दौरान हुई सभा में किसानों ने कहा कि जब तक नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक विरोध जारी रहेगा। इस मौके पर श्रीराम वर्मा, पन्नालाल यादव, सुभाष, मनोज, शकुंतला, रानी देवी, कांता मौर्या, सभाजीत, जय प्रकाश सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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तकरीबन 16 किमी लंबे रिंग रोड निर्माण में 28 गांवों के सैकड़ों किसान परिवार प्रभावित हैं। पिछले साल कार्यदायी संस्था एनएचएआई ने एपको इंफ्राटेक कंपनी को रिंग रोड केनिर्माण का जिम्मा दे दिया। किसानों का कहना है कि आनन-फानन में उनके मकान, बगीचे उजाड़ दिए गए और काम शुरू कर दिया गया। मुआवजा भी काफी कम दिया गया। दबाव बनाकर उनकी जमीन ले ली गई और उनका पक्ष सुना तक नहीं गया। यदि प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी तो जल्द ही सभी प्रभावित गांवों के किसान एक साथ आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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