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प्रदेश के बच्चे भी गणित-विज्ञान में होंगे अव्वल
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 27 Nov 2016 01:58 AM IST
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मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय
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गणित और विज्ञान को हौव्वा समझने वाले प्रदेश के अधिकांश बच्चों की इन विषयों में रुचि बढ़ाने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय ने एक विशेष पहल की है। इसके तहत एनसीईआरटी के सहयोग से फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के सात जिलों के 88 स्कूलों में विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। शनिवार को इस योजना का शुभारंभ मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने किया।
देखा गया है कि दक्षिण भारत समेत कई प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश के बच्चों की गणित और विज्ञान विषय में काफी कम रुचि है। इन विषयों के नाम आते ही वह दूर भागते हैं, जो उत्साह में इन विषयों को लेते हैं उनमें भी अधिकांश बाद में इनसे किनारा कर लेते हैं। इसी को देखते हुए मानव संसाधन मंत्रालय ने यह योजना शुरू की है। केंद्रीय मंत्री डॉ. पांडेय ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए और गुणवत्ता सुधार के लिए हमें प्राथमिक स्तर से ही शुरुआत करनी होगी। परिषदीय विद्यालयों में महज मिड डे मील शिक्षा का आकर्षण न हो बल्कि यहां अच्छी पढ़ाई को आकर्षण बनाना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य का सहयोग भी बेहद जरूरी है।
बताया कि भविष्य में बीएचयू में स्थापित मदन मोहन मालवीय शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से ही ये ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एक साल के अंदर इन सात जिलों के 88 स्कूलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। यहां विज्ञान व गणित विभाग के प्रो. दिनेश कुमार व आईआईटी बीएचयू के प्रो. तन्मय सोम मौजूद रहे। संचालन प्रोग्राम कोआर्डिनेटर प्रो. सुनीता ने व धन्यवाद ज्ञापन विजय शंकर मिश्र ने किया। सात जिलों के डायट के प्रधानाचार्य, प्राध्यापक व बीएसए व डीआईओएस ने भी भाग लिया।
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देखा गया है कि दक्षिण भारत समेत कई प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश के बच्चों की गणित और विज्ञान विषय में काफी कम रुचि है। इन विषयों के नाम आते ही वह दूर भागते हैं, जो उत्साह में इन विषयों को लेते हैं उनमें भी अधिकांश बाद में इनसे किनारा कर लेते हैं। इसी को देखते हुए मानव संसाधन मंत्रालय ने यह योजना शुरू की है। केंद्रीय मंत्री डॉ. पांडेय ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए और गुणवत्ता सुधार के लिए हमें प्राथमिक स्तर से ही शुरुआत करनी होगी। परिषदीय विद्यालयों में महज मिड डे मील शिक्षा का आकर्षण न हो बल्कि यहां अच्छी पढ़ाई को आकर्षण बनाना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य का सहयोग भी बेहद जरूरी है।
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बताया कि भविष्य में बीएचयू में स्थापित मदन मोहन मालवीय शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से ही ये ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एक साल के अंदर इन सात जिलों के 88 स्कूलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। यहां विज्ञान व गणित विभाग के प्रो. दिनेश कुमार व आईआईटी बीएचयू के प्रो. तन्मय सोम मौजूद रहे। संचालन प्रोग्राम कोआर्डिनेटर प्रो. सुनीता ने व धन्यवाद ज्ञापन विजय शंकर मिश्र ने किया। सात जिलों के डायट के प्रधानाचार्य, प्राध्यापक व बीएसए व डीआईओएस ने भी भाग लिया।
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