निशुल्क शिक्षा: आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया दो मार्च से होगी शुरू, जानिए क्या है योग्यता
आरटीई के तहत निजी स्कूलों को आरटीई के पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है। लेकिन अब तक वाराणसी के 109 विद्यालयों ने अपना पंजीकरण नहीं कराया है। इन स्कूलों को 25 फरवरी तक पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में दाखिले के लिए आवेदन की प्रक्रिया दो मार्च से शुरू होगी। इसके लिए आरटीई पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वाराणसी में इस बार तीन चरणों में 1145 निजी स्कूलों में दाखिले होंगे।
पहले चरण के लिए दो मार्च से 25 मार्च तक आवेदन किए जा सकेंगे। आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के मानक में थोड़ा फेरबदल किया गया है। अब तक बच्चों के दाखिले के लिए उनके आवास से एक किलोमीटर के अंदर के निजी स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन किया जा सकता था।
अब अपने वार्ड या ग्राम पंचायत की सीमा में आने वाले निजी स्कूलों में आवेदन कर सकेंगे। वार्ड या ग्राम पंचायत की सीमा में स्कूल न होने की दशा में बीएसए अपने विवेक से विकल्प उपलब्ध कराएंगे। जिला समन्वयक विमल केशरी ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में होगी।
पहले चरण में दो से 25 मार्च के बीच करना होगा आवेदन
पहले चरण में दो से 25 मार्च के बीच आवेदन किया जाएगा। 26 से 28 मार्च तक आवेदकों का सत्यापन होगा। 30 मार्च को लाटरी निकाली जाएगी। चयनित बच्चों का दाखिला पांच अप्रैल तक होगा।
दूसरे चरण में दो अप्रैल से 23 अप्रैल तक ऑनलाइन फार्म लिया जाएगा। 25-26 तक आवेदनों का सत्यापन होगा।
28 अप्रैल को लाटरी निकलेगी। पांच मई तक चयनित बच्चों का दाखिला होगा। तीसरे चरण में 2 मई से 10 जून तक आवेदन जमा होंगे। आवेदनों का सत्यापन 11-13 जून के बीच होगा। 15 जून को लाटरी निकलेगी और 30 जून तक दाखिला लिया जाएगा।
निशुल्क शिक्षा हासिल करने की पात्रता
एससी, एसटी और ओबीसी संवर्ग के अभिभावक, कैंसर व एचआईवी पीड़ित अभिभावक के बच्चे इसके इसके अलावा विकलांग, निराश्रित और ट्रांसजेडर बच्चे को भी आरटीई का लाभ मिलेगा। दुर्बल आर्य वर्ग में ऐसे अभिभावक आएंगे जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम हो, विकलांग अभिभावक, वृद्धाश्रम और विधवा पेंशन पाने अभिभावक के बच्चे भी दाखिले के लिए हकदार होंगे।
30 हजार बच्चों को अब तक नहीं मिली शुल्क प्रतिपूर्ति
आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को किताब, यूनिफार्म और बैग खरीदने के लिए एक मुश्त पांच हजार रुपये देने का प्रावधान है। मगर पिछले तीन सालों से बजट न मिलने से इस धनराशि का भुगतान नहीं हो सका है।