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वैदिक मंत्र, शंख ध्वनि और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा सभागार

Sun, 05 Jun 2022 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jun 2022 12:30 AM IST
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The auditorium reverberated with Vedic chants, conch shell sound and applause
वैदिक मंत्रों व शंख ध्वनि से गूंजता सभागार, चेहरे पर सफलता की खुशी.... कुछ ऐसा नजारा था शनिवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का। मौका था पाणिनि कन्या महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष पर दीक्षांत समारोह का। हाथों में सफलता की उपाधि मिलते ही 50 छात्राओं के चेहरे खिल उठे। उन्हें शाबाशी देने के लिए पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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सभागार में महाविद्यालय की वेद पाठी 50 कन्याओं ने शंख वादन किया। कुछ मिनटों के लिए शंख वादन से पूरा सभागार गूंज उठा। दूसरे दिन की शुरुआत स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं के देव यज्ञ से हुई। जम्मू कश्मीर से आई डॉ. प्रतिभा पुरन्धि के नेतृत्व में छात्राओं ने यज्ञ किया। इसके बाद छात्राओं ने प्रभातफेरी निकाली। दीक्षांत समारोह की शुरुआत शिष्ट यात्रा से हुई, जिसकी अगुवाई आचार्य नंदिता शास्त्री ने की। महाविद्यालय की 50 छात्राओं को उपाधि पत्र देकर सम्मानित किया गया। स्वर्ण जयंती समारोह में महाविद्यालय की स्मारिका ‘पाणिनि-ब्रह्मगवी का विमोचन हुआ। दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य, गायन और वादन की प्रस्तुति दी। वहीं, वेद पाठी कन्याओं ने शास्त्रास्त्र व कराते की प्रस्तुति दी।
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ये रहे मौजूद
समारोह में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री, बीजेपी सह प्रभारी सुनील ओझा, डॉ. वेद प्रताप वैदिक, सुरेश चंद्र अग्रवाल, स्वामी संपूर्णानंद, अजय सेहगल मौजूद रहे। संचालन आचार्य वाचोनिधि व धन्यवाद उपाचार्या डॉ. प्रीति विर्शिनी ने किया। पूर्व मेयर रामगोपाल मोहले, राहुल सिंह, सचिन मिश्रा, प्रतिभा सिंह आदि मौजूद रहे।
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उपाधि पाकर खुश हूं। दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में जिन बच्चों को कौमुदी में रुचि नहीं रहती है। उन्हें पढ़ाती हूं। - डॉ. कविता आर्या, तेलंगाना, महबूबाबाद

माता-पिता का सपना था कि संस्कृत की शिक्षा ग्रहण करूं। प्रथम पड़ाव पूरा हो चुका है। परास्नातक के लिए बीएचयू में आवेदन किया है। - इंद्राणी, झारखंड
फूफा ने गुरुकुल से शिक्षा प्राप्त की है। उनसे प्रेरित होकर संस्कृत की शिक्षा लेने काशी आई थी। बीएचयू से संस्कृत में परास्नातक चल रहा है।
- पूजा आर्या, हिमाचल
उपाधि पाकर खुश हूं। पिता का सपना था कि काशी जाकर शिक्षा ग्रहण करूं। संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से आचार्य की शिक्षा ग्रहण कर रही हूं। - दुर्गा आर्या, नेपाल
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