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Varanasi News: डिग्री वाला वो कागज अब, बस रद्दी ही नजर आता है...
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सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के काव्य प्रकल्प के अंतर्गत काव्यार्चन के 59वें सत्र का आयोजन काव्य साहित्य की विविधता को समर्पित रहा। मंगलवार को अस्सी घाट पर काशी के वरिष्ठ गीतकार पं. सूर्य प्रकाश मिश्रा की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में उदीयमान रचनाकारों ने भी अपनी विशिष्ट शैली की रचनाओं से श्रोताओं का मनोरंजन किया।
पं. सूर्य प्रकाश मिश्र ने अपने सहज गीतों से गंभीर संदेश समाज में संप्रेषित किए। बानगी कुछ यूं रही- रचना तुम पत्थर मत बनना, वाणी बनना स्पंदन की, साधारण अक्षर मत बनना...। विदुषी सहाना ने सुनाया- विद्वान था प्रकांड वो विधान सारे जानता था, ब्राह्मण था ज्ञानी वो त्रिलोचन को मानता था..., जब नयन से मिले तेरी दृष्टि प्रिये, यूं लगे थम गई सारी सृष्टि प्रिये...। मृत्युंजय त्रिपाठी ‘मलंग’ सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित अपनी रचनाओं से विशेष प्रशंसा बटोरी। उन्होंने सुनाया- डिग्री वाला वो कागज अब, बस रद्दी ही नजर आता है, चूल्हे की ठंडी राख देख, आंखों में धुआं भर जाता है...। राजलक्ष्मी मिश्रा ने सुनाया- कौन कहता है कि दौलत से ही जमाना है, यहां तो खाक में भी मोतियों का दाना है...। संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा के संयोजन में अतिथियों का स्वागत डाॅ. नागेश शांडिल्य व धन्यवाद ज्ञापन रुद्रनाथ त्रिपाठी ‘पुंज'''' ने किया। इस मौके पर डाॅ. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, प्रियानाथ पांडेय, गिरीश पांडेय, डॉ. महेंद्र तिवारी, प्रो. वत्सला श्रीवास्तव, डॉ. प्रतापशंकर दूबे, अरुण द्विवेदी, राजेश द्विवेदी, जगदीश्वरी चौबे, प्रियंका अग्निहोत्री, ऋतु दीक्षित, अनु मिश्रा, जया टंडन, डाॅ. अंजना त्रिपाठी आदि रहीं।
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पं. सूर्य प्रकाश मिश्र ने अपने सहज गीतों से गंभीर संदेश समाज में संप्रेषित किए। बानगी कुछ यूं रही- रचना तुम पत्थर मत बनना, वाणी बनना स्पंदन की, साधारण अक्षर मत बनना...। विदुषी सहाना ने सुनाया- विद्वान था प्रकांड वो विधान सारे जानता था, ब्राह्मण था ज्ञानी वो त्रिलोचन को मानता था..., जब नयन से मिले तेरी दृष्टि प्रिये, यूं लगे थम गई सारी सृष्टि प्रिये...। मृत्युंजय त्रिपाठी ‘मलंग’ सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित अपनी रचनाओं से विशेष प्रशंसा बटोरी। उन्होंने सुनाया- डिग्री वाला वो कागज अब, बस रद्दी ही नजर आता है, चूल्हे की ठंडी राख देख, आंखों में धुआं भर जाता है...। राजलक्ष्मी मिश्रा ने सुनाया- कौन कहता है कि दौलत से ही जमाना है, यहां तो खाक में भी मोतियों का दाना है...। संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा के संयोजन में अतिथियों का स्वागत डाॅ. नागेश शांडिल्य व धन्यवाद ज्ञापन रुद्रनाथ त्रिपाठी ‘पुंज'''' ने किया। इस मौके पर डाॅ. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, प्रियानाथ पांडेय, गिरीश पांडेय, डॉ. महेंद्र तिवारी, प्रो. वत्सला श्रीवास्तव, डॉ. प्रतापशंकर दूबे, अरुण द्विवेदी, राजेश द्विवेदी, जगदीश्वरी चौबे, प्रियंका अग्निहोत्री, ऋतु दीक्षित, अनु मिश्रा, जया टंडन, डाॅ. अंजना त्रिपाठी आदि रहीं।
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