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बनारसः एयरपोर्ट पर मिल जाता इलाज तो बच सकती थी थाईलैंड के यात्री की जान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 06 Oct 2018 12:12 PM IST
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थाईलैंड का यात्री
- फोटो : file photo
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अगर थाईलैंड के यात्री को बनारस के बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर ही चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। लापरवाही के कारण छह महीने से हवाई अड्डे पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
यह हाल तब है, जब एयरपोर्ट पर प्रतिदिन 60 उड़ानें संचालित होती हैं। 10 से 12 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। लगभग 2000 कर्मचारी हैं। 27 मार्च को एयरपोर्ट पर तैनात युवती से एक होटल में सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में मेडिकल इमरजेंसी रूम में तैनात डॉ. आशुतोष अस्थाना के जेल जाने के बाद यहां अन्य डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। एमई रूम एक कंपाउंडर के भरोसे है।
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने हाल ही में एयरपोर्ट पर एक एंबुलेंस तथा डॉक्टर की तैनाती का आश्वासन दिया था। एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया के हवाई अड्डों में प्रमुख स्थान रखने वाला एयरपोर्ट से पूर्वांचल के साथ बिहार के भी यात्री विमान यात्रा करते हैं।
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कोलंबो, बैंकाक, शारजाह और नेपाल के अलावा अन्य देशों में भी सैलानी यहां से जाते हैं। एयरपोर्ट पर हेरिटेज हॉस्पिटल द्वारा संचालित मेडिकल इमरजेंसी रूम है लेकिन आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।
बीमार यात्री का प्राथमिक उपचार के बाद उसे एंबुलेंस से शहर के अनुबंधित हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया जाता है। या फिर स्थानीय प्राथमिक और सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र भेजकर उपचार कराया जाता है।
एयरपोर्ट डायरेक्टर एके राय का कहना है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को एयरपोर्ट पर बुलाया जाता है। थाईलैंड के यात्री की हालत और परिस्थितियां ऐसी नहीं थीं कि डॉक्टर बुलाया जाए। उसे जल्द से जल्द निजी अस्पताल भिजवाया गया।
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यह हाल तब है, जब एयरपोर्ट पर प्रतिदिन 60 उड़ानें संचालित होती हैं। 10 से 12 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। लगभग 2000 कर्मचारी हैं। 27 मार्च को एयरपोर्ट पर तैनात युवती से एक होटल में सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में मेडिकल इमरजेंसी रूम में तैनात डॉ. आशुतोष अस्थाना के जेल जाने के बाद यहां अन्य डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। एमई रूम एक कंपाउंडर के भरोसे है।
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स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने हाल ही में एयरपोर्ट पर एक एंबुलेंस तथा डॉक्टर की तैनाती का आश्वासन दिया था। एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया के हवाई अड्डों में प्रमुख स्थान रखने वाला एयरपोर्ट से पूर्वांचल के साथ बिहार के भी यात्री विमान यात्रा करते हैं।
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कोलंबो, बैंकाक, शारजाह और नेपाल के अलावा अन्य देशों में भी सैलानी यहां से जाते हैं। एयरपोर्ट पर हेरिटेज हॉस्पिटल द्वारा संचालित मेडिकल इमरजेंसी रूम है लेकिन आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।
बीमार यात्री का प्राथमिक उपचार के बाद उसे एंबुलेंस से शहर के अनुबंधित हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया जाता है। या फिर स्थानीय प्राथमिक और सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र भेजकर उपचार कराया जाता है।
एयरपोर्ट डायरेक्टर एके राय का कहना है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को एयरपोर्ट पर बुलाया जाता है। थाईलैंड के यात्री की हालत और परिस्थितियां ऐसी नहीं थीं कि डॉक्टर बुलाया जाए। उसे जल्द से जल्द निजी अस्पताल भिजवाया गया।
डायरेक्टर की नहीं सुन रहा अनुबंधित अस्पताल
एक तरफ हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है, वहीं एयरपोर्ट डायरेक्टर एके राय अनुबंधित अस्पताल से छह महीने से पत्राचार ही कर रहे हैं। उनके द्वारा बार-बार भेजे जाने वाले पत्रों पर ध्यान नहीं देने से यात्री आए दिन खामियाजा भुगत रहे हैं। डायरेक्टर का तर्क है कि कोई डॉक्टर यहां टिकता ही नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र होने और एयरपोर्ट तक आने वाले मार्ग के खराब होने को उन्होंने इसका कारण बताया।
बता दें कि थाईलैंड के यात्रियों का दल नई दिल्ली जा रहा था। वहां से उसे श्रीनगर जाना था। बीच में कसोर्न की मौत के बाद उसके परिजन एयरपोर्ट पर उतर गए, जहां से सभी को शहर के एक होटल भेज दिया गया। बड़ागांव पुलिस विदेशी यात्री के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई।
मामला विदेशी यात्री का होने की वजह से पंचनामा के समय मजिस्ट्रेट के तौर पर एसडीएम पिंडरा डॉ. एनएन यादव मौजूद रहे। उधर, थाई भाषा की जानकारी न होने की वजह से मृतक यात्री के परिजनों से संवाद में समस्या आने पर थाई स्माइल एयरलाइंस के स्थानीय प्रबंधक अंकुर ने थाई में बातचीत कर यात्रियों की मदद की।
बता दें कि थाईलैंड के यात्रियों का दल नई दिल्ली जा रहा था। वहां से उसे श्रीनगर जाना था। बीच में कसोर्न की मौत के बाद उसके परिजन एयरपोर्ट पर उतर गए, जहां से सभी को शहर के एक होटल भेज दिया गया। बड़ागांव पुलिस विदेशी यात्री के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई।
मामला विदेशी यात्री का होने की वजह से पंचनामा के समय मजिस्ट्रेट के तौर पर एसडीएम पिंडरा डॉ. एनएन यादव मौजूद रहे। उधर, थाई भाषा की जानकारी न होने की वजह से मृतक यात्री के परिजनों से संवाद में समस्या आने पर थाई स्माइल एयरलाइंस के स्थानीय प्रबंधक अंकुर ने थाई में बातचीत कर यात्रियों की मदद की।
2017 में हुई चार यात्रियों की मौत
- 11 जनवरी: संगीता यादव बरियासनपुर की स्पाइस जेट के विमान से मुंबई से वाराणसी आते समय
- 24 नवंबर: मुंबई जा रहे 65 साल के इंद्रभूषण की इंडिगो की फ्लाइट में
- 11 दिसंबर: हैदराबाद जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह को दिल का दौरा पड़ा
- 20 दिसंबर: वियतनाम निवासी नेगुयेन एनकेट (70) की मौत
- 24 नवंबर: मुंबई जा रहे 65 साल के इंद्रभूषण की इंडिगो की फ्लाइट में
- 11 दिसंबर: हैदराबाद जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह को दिल का दौरा पड़ा
- 20 दिसंबर: वियतनाम निवासी नेगुयेन एनकेट (70) की मौत