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Research: दुनिया की 256 करोड़ साल पुरानी चट्टान मध्य प्रदेश में मिली, 10 भू वैज्ञानिकों ने खोजा

Wed, 22 Jul 2026 02:58 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 22 Jul 2026 02:58 PM IST
सार

दुनिया की 256 करोड़ साल पुरानी चट्टान मध्य प्रदेश में मिली है। बीएचयू, आईआईटी कानपुर, ब्राजील और जापान के 10 भू वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया है। 

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Ten geoscientist from BHU IIT Kanpur Brazil and Japan discovered 2.56-billion-year-old rock in Madhya Pradesh
चट्टान - फोटो : Istock

विस्तार

बीएचयू, आईआईटी कानपुर, ब्राजील और जापान के 10 भू वैज्ञानिकों ने मध्य प्रदेश में दुनिया की दूसरी सबसे प्राचीन ग्रेनाइट चट्टानों का पता लगाया है। ये 256 करोड़ साल पुरानी हैं। सबसे पुरानी ऑस्ट्रेलिया में पाई गई थीं। एमपी में मिले ग्रेनाइट देखने में क्रिकेट के बॉल या फिर पेड़ों के छल्ले की तरह से हैं। 

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एमपी के शिवपुरी जिले के पिछोर इलाके में ये पाए गए हैं इसलिए इसे पिछोर ऑर्बिकुलर ग्रेनाइट नाम दिया गया है। ये पत्थर इस धरती के बाल्यकाल में लेकर जा रहे हैं। इस शोध में बीएचयू के छह और बाकी चार दूसरे संस्थानों के एक-एक वैज्ञानिक शामिल रहे। 
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यह रिसर्च साइंस डायरेक्ट के जियोसिस्टम्स और जियोएनवायरनमेंट पेपर में प्रकाशित हो चुका है। पिछोर इलाके के कुटावली गांव के पास इस दुर्लभ चट्टान की खोज की गई है। इस चट्टान के उम्र की पुष्टि यू-पीबी जिरकॉन डेटिंग तकनीक के बाद हुई। 
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पता चला कि कुछ जिरकॉन कण 3.5 अरब वर्ष पुराने पाए गए, जो दिखाते हैं कि नियो आर्कियन युग में पृथ्वी के सतह का निर्माण हो रहा था। यह खोज पृथ्वी के शुरुआती महाद्वीपीय क्रस्ट के निर्माण की प्रक्रियाओं को समझने में मदद करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस चट्टान के संरक्षण की जरूरत है। 2.5 अरब वर्ष पुराने रिकॉर्ड को मिटाने का खतरा हो सकता है।

इन वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है रिसर्च
बीएचयू के भूविज्ञान विभाग से डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, संजीव कुमार, शोधार्थी दक्षिता, संजीव, अजय कुमार और बलराम साहू शामिल हैं। इनके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ कैंपिनास-यूनिकैंप (ब्राजील), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर, जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जेएआईएसटी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) बरहामपुर और ऑलजियो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के शोधकर्ता इस शोध टीम में शामिल रहे।
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