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Varanasi News: नॉन एपिलिप्सी सिंड्रोम की चपेट में आ रहे हैं किशोर युवा

Sun, 17 Nov 2024 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2024 12:25 AM IST
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Teenagers are becoming vulnerable to non-epilepsy syndrome.
राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर विशेष
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नॉन एपिलिप्सी सिंड्रोम की चपेट में आ रहे हैं किशोर युवा
-बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग में पहुंच रहे हैं हर महीने 30 नये मरीज
-झटके आने, चेहरा हिलने के साथ ही बेहोशी की समस्या
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। मिर्गी जो कि बढ़ती उम्र की बीमारी मानी जाती है, अब इसकी चपेट में किशोर, युवा भी तेजी से आते रहे हैं। आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में हर महीने 8 से 28 साल तक के 30 नए मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें ज्यादातर को बेहोशी और झटके आने की समस्या हो रही है। चिकित्सकीय भाषा में इस तरह के लक्षण को साइकोलॉजिकल नॉन एपिलेप्सी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर समय से जांच, इलाज करवाया जाए तो इस बीमारी से निजात मिल सकती है।
मिर्गी के कारण, बचाव के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। बीएचयू में चलने वाली न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में 300 से अधिक मरीज हर दिन आते हैं। इसमें 50 से अधिक संख्या 30 से कम उम्र वाले मरीजों की रहती है। विभागाध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि मिर्गी का इलाज करवाने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बहुत से लोग इलाज करवाने के बजाय झाड़ फूंक पर विश्वास कर बीमारी को बढ़ा रहे हैं। ओपीडी में आने वाले किशोर, युवाओं की बात करें तो झटके आने, कभी हाथ हिलना तो कभी चेहरा हिलने लगता है। कभी मुंह से झाग आने की समस्या भी मिल रही है। मनोवैज्ञानिक दबाव की वजह से भी झटके आते हैं। चिंता की बात यह है कि ओपीडी में आने वाले 30 किशोरों-युवाओं में 10 की उम्र 15 साल से कम रहती है। हालांकि अब जागरूकता के कारण लोग अस्पताल में आ रहे हैं। वहीं, प्रदूषण की वजह से न्यूरो सिस्टि सरकोसिस बीमारी भी बढ़ रही है। ये बीमारी उन जगहों पर रहने वालों को भी हो रही है, जहां नाले बहते हैं, या फिर खेतों मेें गंदा पानी जा रहा है और लोग उससे सींची गई सब्जी खा रहे हैं।
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नाव और घाट पर ओपीडी, जिलों में जागरूकता अभियान
प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि न्यूरोलॉजिकल बीमारी से लोगों को बचाने के उद्देश्य से काशी में बीच गंगा नाव पर ओपीडी चलाई जाती है। इसके अलावा मानसरोवर, पंचगंगा, राजघाट पर ओपीडी में भी लोगों की निशुल्क जांच कर उपचार किया जाता है। यहां अब तक 950 लोगों की जांच हुई, जिसमें 45 मरीज मिर्गी वाले मिले हैं। इनका इलाज भी करवाया जा रहा है। वाराणसी, मिर्जापुर, चंदौली, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, बक्सर, भभुआ समेत 17 जिलों में लोगों को जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यहां लोगों को मिर्गी की भ्रांति दूर करने के लिए फिल्म भी दिखाया जा रहा है।
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मिर्गी का असर
80 प्रतिशत लोगों में -30 सेकेंड तक
15 प्रतिशत में -5 मिनट तक
5 प्रतिशत-30 मिनट तक
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