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तकनीकी के हुनरमंदों ने कोरोना काल में थामा समाजसेवा का हाथ

Wed, 15 Sep 2021 01:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 01:14 AM IST
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Technical skills took the hand of social service during the Corona period
आज इंजीनियर्स डे है। आमतौर पर इंजीनियर की पहचान उसके द्वारा बनाई गई इमारत या इजाद की गई तकनीक से होती है। लेकिन आज हम इंजीनियर्स डे पर कुछ ऐसे ही इंजीनियर्स से रूबरू करा रहे हैं। जिन्होंने डिग्री तो इंजीनियरिंग की ली, लेकिन कोरोना महामारी के दौर में उन्होंने समाजसेवा कर लोगों को मदद पहुंचाई।
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फ्रांस से की काशीवासियों की मदद
बनारस के नितिन श्रीवास्तव फ्र ांस के लियोन शहर के एचसीएल कंपनी में कार्यरत हैं। कोरोना काल में नितिन को सोशल मीडिया के जरिए जब सूचना मिली की लोग भूख और दवा के अभाव में तड़प रहे हैं। तो उन्होंने वाराणसी के ही रमेश श्रीवास्तव, रविंद्र पांडेय, लखनऊ से सिद्धांत सिन्हा, फ्रांस से रश्मि और दीपक, आयरलैंड से विजय पॅाल के साथ मिलकर लोगों की मदद की। कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए उन्होंने फोन नंबर और ई-मेल जारी किया था। कोरोना पीड़ित को जैसी जरूरत होती थी वैसी मदद पहुंचाई। यही नहीं फ्रांस पढ़ने गए भारतीय मूल के 25 बच्चों को महामारी में रहने खाने की मदद करने के लिए इन्हें फ्रांस में स्थित भारतीय दूतावास ने सम्मानित भी किया है।
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अमेरिका से भेजे ऑक्सीजन कंसनट्रेटर
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब लोगों के सामने ऑक्सीजन कंसनट्रेटर की समस्या खड़ी हो गई थी। उस समय यूएसए के टक्सास में रहने वाले इंजीनियर राजेश सिंह ने बनारस में अपने दोस्तों की मदद से लोगों तक मदद पहुंचाई। राजेश मूल रूप से लालपुर क्षेत्र के नटिनियादाई के रहने वाले है। राजेश बताते है कि बनारस में रहने वाले सीए सोसाइटी के सदस्य मेरे दोस्त हैं। हमने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को जोड़ा। ग्रुप में जब भी किसी की मदद का संदेश आता तो सभी सक्रिय होकर अपनी ओर से मदद पहुंचाया करते थे। ऑक्सीजन कंसनट्रेटर ही नहीं, जरूरी दवाईयों व अन्य जरूरी उपकरण भी कारर्गों विमान के जरिए भेजवाया जाता था।
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नौकरी छोड़ी, स्टार्टअप कर तीन को दिया रोजगार
हार्डवेयर नेटवर्किंग का कोर्स करने के बाद पिशाचमोचन निवासी कौस्तुभ पांडेय को दिल्ली की कंपनी में 18 लाख के पैकेज पर जॉब मिली। लेकिन कौस्तुभ को माहौल रास नहीं आया और उन्होंने एक महीने में नौकरी छोड़ अपने शहर वापस आ गए। कौस्तुब ने नगवां क्षेत्र में ही इसी वर्ष मार्च में अपनी 182 अलग-अलग स्वाद की चाय से जुड़ा स्टार्टअप शुरू किया। कौस्तुब के टी स्टॉल पर 15 रुपये से लेकर 800 रुपये तक की चाय मौजूद है। इस स्टार्टअप को शुरू करने में उन्हें 12 लाख रुपये का खर्च आया। अभी वे तीन युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।
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