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‘असि-वरुणा की व्यथा-कथा’ देखकर छलकीं लोगों की आंखें
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 23 May 2016 02:08 AM IST
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तुलसीघाट पर 'असि-वरुणा की व्यथा-कथा' में नाटक का मंचन करतीं छात्राएं।
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‘असि-वरुणा की व्यथा-कथा’ को तुलसी घाट पर रविवार शाम नाट्य मंचन के भावों के जरिए अभिव्यक्त किया गया। गोपी राधा बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत इस नाटक के जरिए वरुणा की तर्ज पर असि नदी को भी पुनर्जीवित करने और अविरल-निर्मल बनाने की अपील की गई। नाटक को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए। नाटक का निर्देशन राज कुमार ने किया।
मुख्य अतिथि सूबे के लोक निर्माण एवं सिंचाई राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल ने कहा कि असि-वरुणा, गंगा की इस व्यथा को सिर्फ मंचन तक सीमित रखने की बजाए, हमें अपने आचरण में उतारने की जरूरत है। कहा, अविरलता के बिना गंगा की निर्मलता की बात नाइंसाफी होगी। इसीलिए हम वरुणा के निर्मलीकरण के काम के साथ ही अविरलता का भी प्रबंध कर रहे हैं। वरुणा निर्मलीकरण की जो परियोजना बनाई गई है उसमें अविरलता को प्रमुखता से शामिल किया गया है। पटेल ने नाटक का मंचन करने वाली छात्राओं को 21 हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया। कहा कि इन बच्चों में प्रतिभा है। ऐसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर सचिव योगेंद्र यादव ने किया। यह कार्यक्रम गंगा ज्ञानदीप की ओर से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि वरुणा की तर्ज पर अखिलेश सरकार को वरुणा की तर्ज पर ही असि नदी के उद्धार का काम करना चाहिए। असि वाराणसी की अस्मिता से जुड़ी नदी है। उन्होंने वरुणा कॉरीडोर परियोजना को सुखद और सार्थक कदम बताया। प्रदेश की सरकार नदियों की रक्षा के लिए तत्परता से कदम उठा रही है। इससे पर्यावरण तो सुधरेगा ही, लाखों लोगों को नरकतुल्य जीवन से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि वरुणा के बाद इसी तरह असि नदी का भी उद्धार होना चाहिए। वरुणा-असि के बिना वाराणसी की महत्ता नहीं रह जाएगी। हमें काशी की इन दोनों प्रधान नदियों को बचाने का संकल्प लेना होगा।
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मुख्य अतिथि सूबे के लोक निर्माण एवं सिंचाई राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल ने कहा कि असि-वरुणा, गंगा की इस व्यथा को सिर्फ मंचन तक सीमित रखने की बजाए, हमें अपने आचरण में उतारने की जरूरत है। कहा, अविरलता के बिना गंगा की निर्मलता की बात नाइंसाफी होगी। इसीलिए हम वरुणा के निर्मलीकरण के काम के साथ ही अविरलता का भी प्रबंध कर रहे हैं। वरुणा निर्मलीकरण की जो परियोजना बनाई गई है उसमें अविरलता को प्रमुखता से शामिल किया गया है। पटेल ने नाटक का मंचन करने वाली छात्राओं को 21 हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया। कहा कि इन बच्चों में प्रतिभा है। ऐसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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कार्यक्रम का संचालन समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर सचिव योगेंद्र यादव ने किया। यह कार्यक्रम गंगा ज्ञानदीप की ओर से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि वरुणा की तर्ज पर अखिलेश सरकार को वरुणा की तर्ज पर ही असि नदी के उद्धार का काम करना चाहिए। असि वाराणसी की अस्मिता से जुड़ी नदी है। उन्होंने वरुणा कॉरीडोर परियोजना को सुखद और सार्थक कदम बताया। प्रदेश की सरकार नदियों की रक्षा के लिए तत्परता से कदम उठा रही है। इससे पर्यावरण तो सुधरेगा ही, लाखों लोगों को नरकतुल्य जीवन से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि वरुणा के बाद इसी तरह असि नदी का भी उद्धार होना चाहिए। वरुणा-असि के बिना वाराणसी की महत्ता नहीं रह जाएगी। हमें काशी की इन दोनों प्रधान नदियों को बचाने का संकल्प लेना होगा।
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