फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Swiss experts found a solution in work was stuck for 30 days

Kashi Ropeway: स्विटजरलैंड के विशेषज्ञों ने 30 दिन से अटके काम का रास्ता ढूंढा, शाही नाले को नहीं छेड़ा जाएगा

Wed, 10 Apr 2024 11:59 PM IST
अमन विश्वकर्मा गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 10 Apr 2024 11:59 PM IST
सार

Varanasi News: जेम्स प्रिंसेप की कल्पना के अनुसार, इसका काम 1827 में पूरा हुआ था। इसे लाखौरी ईंट और बरी मसाला से बनाया गया था। अस्सी से कोनिया तक इसकी लंबाई 24 किलोमीटर है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे के लिए उपकरण स्विट्जरलैंड और रोप ऑस्ट्रिया से आ रहे हैं।

विज्ञापन
Swiss experts found a solution in work was stuck for 30 days
वाराणसी में रोपवे निर्माण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में रोपवे निर्माण में बाधक बने शाही नाले का विकल्प तलाश लिया गया है। स्विटजरलैंड, आस्ट्रिया और देश केविशेषज्ञों की राय लेने के बाद निर्णय लिया गया कि शाही नाले को छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। क्योंकि इस पर शहर की सीवर व्यवस्था टिकी है। शाही नाले केकिनारे पिलर की नींव तैयार की जाएगी। इसके लिए आने वाले निर्माण कार्यों को ही तोड़ा जाएगा।

विज्ञापन


बता दें कि इसे देखते हुए गिरिजाघर के पास निर्माण कार्य के दौरान जब पता चला कि नीचे शाही नाला गया है तो उसकी जांच की गई। चार फीट चौड़ा और चार फीट लंबा गड्ढा खोदकर देखा गया कि नाले का स्वरूप क्या है। इस पर कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि कंक्रीट का टी बनाकर इसका निर्माण कराया जा सकता है। 
विज्ञापन


इससे शाही नाले को कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन भविष्य में यदि नाला धंसा तो पिलर के भी धंसने का खतरा हो सकता है। इसे देखते हुए नाले के किनारे नींव बनाने पर सहमति बनी। इसे देखते हुए गिरजाघर के आस पास केनिर्माण कार्यों को तोड़ा जा रहा है ताकि नींव बनाने में किसी प्रकार की दिक्कत न आने पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुगलकाल के दौरान बने शाही नाला पर निर्भर है शहर की सीवर व्यवस्था
मुगलकाल के दौरान 17वीं शताब्दी के दौरान शाही नाला का निर्माण हुआ था। उस समय इसे शाही सुरंग के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में इसी पर शहर की सीवर व्यवस्था टिकी है। इसकी खासियत यह बताई जाती है कि इसके अंदर से दो हाथी एक साथ गुजर सकते हैं।

जेम्स प्रिंसेप ने इसे सीवर व्यवस्था में किया तब्दील
अंग्रेजों ने इसी शाही सुरंग के सहारे बनारस की सीवर समस्या सुलझाने का काम शुरू किया। जेम्स प्रिंसेप की कल्पना के अनुसार, इसका काम 1827 में पूरा हुआ था। इसे लाखौरी ईंट और बरी मसाला से बनाया गया था। अस्सी से कोनिया तक इसकी लंबाई 24 किलोमीटर है। यह नाला अस्सी, भेलूपुर, कमच्छा, गुरुबाग, गिरिजाघर, बेनियाबाग, चौक, पक्का महाल, मच्छोदरी होते हुए कोनिया तक गया है। रोबोटिक कैमरों के जरिये काशी के इस प्राचीन नाले के स्वरूप काो सुधारा गया।

शाही नाले को छेड़ा नहीं जाएगा। स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और देश के विशेषज्ञों की राय पर शाही नाले के किनारे पिलर के लिए नींव बनाई जाएगी। - पूजा मिश्रा, प्रोजेक्ट मैनेजर, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड

सबसे पहले बनकर तैयार होगा काशी विद्यापीठ और रथयात्रा रोपवे स्टेशन
रोपवे निर्माण में सबसे पहले काशी विद्यापीठ और रथयात्रा में रोपवे स्टेशन बनकर तैयार होगा। यहां गंडोला के लिए प्लेटफॉर्म बनाने का काम हो गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे के लिए उपकरण स्विट्जरलैंड और रोप ऑस्ट्रिया से आ रहे हैं। स्टेशन के फसाड लाइटिंग के लिए भी सामग्री वाराणसी पहुंच गई है। 

इसके निर्माण पर 807 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गंडोला में दस यात्री बैठेंगे। इसकी सीट फोल्ड हो सकती है। इससे दिव्यांगों के व्हीलचेयर भी आसानी से गंडोला में आ सकेंगे। रोपवे स्टेशन पर वाराणसी की कला, संस्कृति व अध्यात्म के साथ देवालय का रूप भी दिखाई देगा। जल्द ही रोपवे के ट्रायल रन की भी योजना है। 


प्रथम चरण के पहले सेक्शन के तीन स्टेशनों में से सबसे पहले भारत माता मंदिर स्थित काशी विद्यापीठ और रथयात्रा का रोपवे स्टेशन बनकर तैयार होगा। दोनों स्टेशनों के बीच 8 टावर होंगे। मई के अंत तक निर्माण के सभी उपकरणों के वाराणसी पहुंचने की संभावना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed