स्वाइन फ्लू का बढ़ा खतरा: बीएचयू की जांच में अब तक 109 मरीज मिले, इनमें 53 वाराणसी के; एक से तीन तक संक्रमण
बीएचयू की जांच में अब तक स्वाइन फ्लू के 109 मरीज मिले हैं। इनमें 53 वाराणसी के हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। ये संक्रमण एक से तीन सदस्यों तक पहुंच रहा है।
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बीएचयू की जांच में अब तक स्वाइन फ्लू के 109 मरीज मिल चुके हैं। इनकी जांच बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हुई है। अकेले वाराणसी के 53 स्वाइन फ्लू पीड़ित हैं। 56 मरीज पूर्वांचल के दूसरे जिलों के हैं। एक अगस्त से सात सितंबर के बीच पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से 405 सैंपल बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भेजे गए थे।
जांच में 109 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वाराणसी में जो मरीज मिले हैं उनमें 15 बच्चे और 20 महिलाएं शामिल हैं। सीएमओ डॉ एनपी सिंह ने बताया कि बीएचयू में पिछले एक महीने में 33 स्वाइन फ्लू के मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें 22 डिस्चार्ज हो चुके हैं। वर्तमान में 11 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें नौ बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और दो मंडलीय अस्पताल में भर्ती हैं। बाकी मरीज आइसोलेशन में हैं।
एक सदस्य से तीन सदस्यों में पहुंच रहा संक्रमण
- केस -1: चोपन कर रहने वाली ऊषा बेटे का जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंची थीं। बेटे को भर्ती किया तो स्वयं और छोटा बेटा भी वायरल से पीड़ित हो गया। अब वह अपना भी उसी अस्पताल में इलाज करा रही हैं।
- केस -2: राजातालाब की कुसुम लता पिछले तीन दिनों से बुखार और जुकाम से पीड़ित थीं। दो दिनों तक निजी मेडिकल स्टोर से दवा ली, लेकिन आराम नहीं हुआ। देखते-देखते पति और बेटे को भी यही समस्या हो गई। सोमवार को जिला अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने कई जांचें लिखीं।
अस्पताल में इलाज के लिए आने वाला हर चौथा मरीज वायरल से पीड़ित है। अस्पतालों की ओपीडी से लेकर रजिस्ट्रेशन काउंटर, पैथोलॉजी और दवा काउंटर पर लंबी लाइन लग रही है। सोमवार को मंडलीय और जिला अस्पताल के लैब के बाहर पांव रखने की जगह नहीं थी। मरीजों को जांच के लिए अपनी पारी के लिए न्यूनतम 30-35 मिनट इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मनीष यादव बताते हैं कि बारिश और बाढ़ के बाद वायरल इंफेक्शन के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। यह मुख्य रूप से इंफ्लूएंजा और पैराइंफ्लूएंजा जैसे वायरस के कारण होता है। इसमें सर्दी, जुकाम, खांसी, बदन दर्द और तेज बुखार के लक्षण सामने आते हैं। इस बार कई मरीजों में उल्टी और दस्त के लक्षण भी सामने आए हैं। इंफेक्शन के कारण प्लेटलेट्स की संख्या भी घट रही है। यदि इस प्रकार के लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज लें और बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवा न लें। विशेषकर एंटीबायोटिक का प्रयोग न करें, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है।
जिले में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। प्रभावित मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखकर निगरानी में इलाज किया जा रहा है। सभी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी पर दवाओं और जरूरी जांच किट की पर्याप्त उपलब्धता है। आमजन से अपील है कि घबराएं नहीं, लेकिन लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर ही परामर्श लें। सेल्फ-मेडिकेशन से बचें। -डॉ. एनपी सिंह, सीएमओ
स्वाइन फ्लू के लक्षण
- चिकित्सकों के मुताबिक, स्वाइन फ्लू के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के एक से तीन दिनों के भीतर दिखने लगते हैं।
- तेज बुखार और ठंड लगना या अचानक शरीर का तापमान बढ़ना।
- लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी होना।
- मांसपेशियों, जोड़ों और पीठ में असहनीय दर्द।
- अत्यधिक थकान और कमजोरी, सामान्य दैनिक कार्य करने में भी असमर्थ महसूस होना।
- छींक आना और सांस लेने में हल्की असहजता।
- कुछ मामलों में दस्त (डायरिया) और उल्टी की समस्या भी होती है।
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय
- साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं। अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर या किसी बीमार व्यक्ति के पास जाते समय थ्री-प्लाई सर्जिकल मास्क पहनें।
- बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें, क्योंकि यहीं से वायरस शरीर में प्रवेश करता है।
- खांसते या छींकते समय हमेशा टिशू या अपनी कोहनी की मोड़ का उपयोग करें, टिशू को तुरंत ढक्कनदार डस्टबिन में फेंकें।
- फ्लू के लक्षण वाले लोगों से कम से कम 1 से 2 मीटर की दूरी बनाए रखें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी, सूप, गुनगुना पानी पीएं और पर्याप्त नींद लें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।