{"_id":"98646255eb606b247765e5a5f131478d","slug":"swedish-language-translation-of-the-ramayana-will-be-in-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वीडिश भाषा में होगा रामायण का अनुवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वीडिश भाषा में होगा रामायण का अनुवाद
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 03 Oct 2015 02:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राम के चरित्र के जरिये दिए गए सामाजिक उत्थान के संदेश से अब स्वीडन के लोग भी वाकिफ हो सकेंगे। रामायण का अनुवाद स्वीडिश भाषा में किया जाएगा। इसमें करीब पांच साल लगेंगे। अनुवाद के बाद इस रामायण को स्वीडन के कार्लस्टड विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में रखा जाएगा।
विज्ञापन
यहां रामायण पर शोध भी किए जाएंगे। बीएचयू के न्यूरोलाजी विभाग के हेड प्रो. वीएन मिश्रा और कार्लस्टड विश्वविद्यालय के धर्म विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन केंद्र के बीच इस पर सहमति बनी है।
विज्ञापन
यह काम धर्म विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन केंद्र के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर मार्क कार्ट्स की देखरेख में होगा। गौरतलब है कि प्रो. मिश्रा ने देश-विदेश से 1500 से ज्यादा पांडुलिपियों का संग्रह किया है। जल्द ही काशी में तुलसी घाट पर इसके लिए संग्रहालय भी बनाने की तैयारी है।
विज्ञापन
प्रो. वीएन मिश्रा ने एक दिन पहले कार्लस्टड विश्वविद्यालय में पांडुलिपियों पर व्याख्यान दिया। आयोजन धर्म विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन विभाग की ओर से कराया गया था। कार्यक्रम के दौरान ही उनकी मुलाकात प्रो. मार्क कार्ट्स से हुई। प्रो. मार्क का काशी से पांच दशक पुराना रिश्ता है।
मुलाकात के दौरान उन्होंने काशी की रामलीला और अस्सी-भदैनी मुहल्ले समेत काशी से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। कहा कि रामनगर और तुलसीघाट की रामलीला देखने वह इस बार आने वाले थे, लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से नहीं आ पाए। उन्होंने मार्च में काशी आने का वादा किया।
मुलाकात के दौरान ही ‘काशी-कार्लस्टड के लोग’ नाम से नया फे सबुक पेज बनाया गया। प्रो. मार्क ने इसका भी उद्घाटन किया। इसमें काशी और स्वीडन के लोगों को जोड़ा जाएगा। एक दूसरे की धर्म-संस्कृति, पर्यावरण, सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी फेसबुक के जरिए दोनों देशों के लोगों को मिलती रहेगी।
फेसबुक के जरिए ही जानकारी मिलने पर अध्ययन के लिए एक-दूसरे के देश में जाने वाले छात्रों की भी मदद की जाएगी। स्वीडन के दौरे पर गए प्रो. मिश्रा ने फोन पर बताया कि मुलाकात के दौरान प्रो. मार्क को काशी में बने भगवान राम, हनुमान, रावण समेत देवताओं के मुखौटे भी भेंट किए।