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स्वर्वेद महामंदिर धाम: 5101 कुंडीय महायज्ञ में हजारों अनुयायियों ने दी आहुति
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 13 Dec 2018 10:15 PM IST
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स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आयोजित विहंगम योग संत समाज
- फोटो : अमर उजाला
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स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आयोजित विहंगम योग संत समाज के 95वें वार्षिकोत्सव समारोह के दूसरे दिन गुरुवार को 5101 कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ में हजारों अनुयायियों ने आहुति दी। यज्ञ का शुभारंभ सद्गुरु आचार्य स्वतंत्र देव जी महाराज एवं संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज की उपस्थिति में ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वजा फहराकर किया गया। वैदिक मंत्रों की ध्वनि से वातावरण गूंज उठा।
अनुयायियों को संबोधित करते हुए संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि यज्ञ का अर्थ है त्याग, सेवा, सहयोग और समर्पण। यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठतम कर्म है। यह श्रेष्ठ मनोकामना की पूर्ति और पर्यावरण शुद्धि का भी साधन है। वैदिक हवन यज्ञ हमारे भीतर त्याग की भावना का विकास करता है। मैं और मेरा से ऊपर उठकर विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
सांयकालीन सत्र में आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति की गई। इसके बाद तीन आध्यात्मिक ग्रंथ रत्नों का भी विमोचन किया गया। जिसमें सद्गुरु स्वतंत्र देव जी महाराज की अमृत वाणियों का संग्रह ‘अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’ तथा संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज की दिव्य वाणियों का संग्रह ‘दीये से दीया जलाएं’ एवं ‘स्वर्वेद प्रचार यात्रा’ का विमोचन किया गया।
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महायज्ञ में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मप्र, महाराष्ट्र, गुजरात आदि कई राज्यों के अलावा नेपाल, भूटान, अमेरिका, कनाडा आदि देशों के भक्त शामिल हुए। यज्ञ के पश्चात सद्गुरु एवं संत प्रवर के दर्शन के लिए अनुयायी उमड़ पड़े। झूसी आश्रम से आये दर्जनों वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार कर बच्चों का मुंडन संस्कार कराया।
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अनुयायियों को संबोधित करते हुए संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि यज्ञ का अर्थ है त्याग, सेवा, सहयोग और समर्पण। यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठतम कर्म है। यह श्रेष्ठ मनोकामना की पूर्ति और पर्यावरण शुद्धि का भी साधन है। वैदिक हवन यज्ञ हमारे भीतर त्याग की भावना का विकास करता है। मैं और मेरा से ऊपर उठकर विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
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सांयकालीन सत्र में आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति की गई। इसके बाद तीन आध्यात्मिक ग्रंथ रत्नों का भी विमोचन किया गया। जिसमें सद्गुरु स्वतंत्र देव जी महाराज की अमृत वाणियों का संग्रह ‘अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’ तथा संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज की दिव्य वाणियों का संग्रह ‘दीये से दीया जलाएं’ एवं ‘स्वर्वेद प्रचार यात्रा’ का विमोचन किया गया।
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महायज्ञ में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मप्र, महाराष्ट्र, गुजरात आदि कई राज्यों के अलावा नेपाल, भूटान, अमेरिका, कनाडा आदि देशों के भक्त शामिल हुए। यज्ञ के पश्चात सद्गुरु एवं संत प्रवर के दर्शन के लिए अनुयायी उमड़ पड़े। झूसी आश्रम से आये दर्जनों वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार कर बच्चों का मुंडन संस्कार कराया।
महायज्ञ के उपरांत करीब 1300 नए जिज्ञासुओं ने ब्रह्मविद्या विहंगम योग के क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा ग्रहण कर जीवन का आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किया। इस आयोजन में प्रतिदिन नि:शुल्क योग, आयुर्वेद, पंचगव्य, होम्योपैथ आदि चिकित्सा पद्धतियों परामर्श दिया जा रहा है।
गो प्रदर्शनी व साहित्य के लिए लगी रही भीड़
मंदिर से कुछ दूर गो प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें कूप, गुफाएं और गोशाला आदि की झांकी देखने के लिए भीड़ उमड़ी। वहीं विहंगम सेवा केंद्र के स्टाल में आश्रम द्वारा प्रकाशित साहित्य, आध्यात्मिक मासिक पत्रिका, विशुद्ध जड़ी बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक औषधियां मौजूद रहीं।
गो प्रदर्शनी व साहित्य के लिए लगी रही भीड़
मंदिर से कुछ दूर गो प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें कूप, गुफाएं और गोशाला आदि की झांकी देखने के लिए भीड़ उमड़ी। वहीं विहंगम सेवा केंद्र के स्टाल में आश्रम द्वारा प्रकाशित साहित्य, आध्यात्मिक मासिक पत्रिका, विशुद्ध जड़ी बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक औषधियां मौजूद रहीं।