उत्तराखंड में आई बाढ़ पर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती का बड़ा बयान, कहा-सैलाब अप्रत्याशित नहीं, दी गई थी चेतावनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी में गंगा महासभा के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि जो बह गए उनमें से शायद ही कोई भाग्यशाली होगा जो जिंदा बचा होगा। लगभग दो सौ लोगों के मारे जाने का अनुमान है। साल 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद ये सबसे बड़ी तबाही है। जो कुछ दृष्टिगत हो रहा है, वो बहुत डरावना है।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चमोली जिले में धौलीगंगा नदी में ग्लेशियर के फटने और हिमस्खलन के कारण आई बाढ़ के सामने बांध, पुल, मनुष्य जो भी सामने पड़े तिनके की तरह सैलाब में बह गए। चाहे केदारनाथ की आपदा हो या धौलीगंगा में आया सैलाब, ये अप्रत्याशित नहीं है। वैज्ञानिकों और संतों ने बार-बार चेताया है।
प्रो. टी शिवाजी राव ने 2005 में ही टिहरी बांध को टाइम बम कहा था। देश को इसी प्रकार की तबाहियों से बचाने के लिए स्वामी साननंद जी ने प्राण दे दिए। सानंद जी साधारण सन्यासी नहीं थे। बहुत बड़े वैज्ञानिक थे। आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सचिव रह चुके थे। हजारों इंजीनियर उन्होंने तैयार किए। सन्यासी तो गंगा जी को बचाने के लिए बने थे। दुर्भाग्य कि प्रधानमंत्री ने भी उन्हें अनसुना किया।
महामंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आज जो कुछ हो रहा है, वह सरकार की हठधर्मिता और लापरवाही का परिणाम है। चमोली जिले के रैणी गांव के लोग लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन बांध कंपनी नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्र के भीतर लगातार विस्फोटक का इस्तेमाल कर रही थी। आज की आपदा उसी का परिणाम है।
हिमस्खलन के टूटने से ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन मालिक और नेता सब सुरक्षित हैं। नुकसान का जायजा लेने के लिए हेलीकॉप्टर में उड़ रहे हैं। मरे हैं मजदूर। सैंकड़ों की संख्या में मजदूरों के बह जाने की सूचना है और राहतकार्य जारी है। सुरंग में फंसे कुछ लोगों को बचा भी लिया गया है। भगवान सबकी रक्षा करें और नेताओं को सद्बुद्धि दें।