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सुर-लय-ताल की त्रिवेणी से चहका अंध विद्यालय परिसर
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दुर्गाकुंड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय परिसर में आयोजित 31वीं शिवरात्रि संगीत महोत्सव की दूसरी निशा नारी शक्ति को समर्पित रही। पहली प्रस्तुति सितार वादक डॉ. सुप्रिया शाह ने दी। वादन की शुरुआत राग मारू विहग में अलाप, जोड़ के पश्चात विलंबित द्रुत तीन ताल में बंदिश पेश कर रोम रोम झंकृत कर दिया।
नूपुर जोशी ने राग गावति विलंबित तिलवाड़ा ताल में निबद्ध बंदिश प्रस्तुत किया। उसके बाद कर्नाटक संगीत शैली में उत्तकडु वेंकट कवि की रचना नटवर तारणी प्रस्तुत किया। इसके बाद ठुमरी में होरी गीत में तो खेलूंगी उनही से होरी गुइयां तथा अंत में भजन शिवरामा कृष्णा काशी विश्वनाथम की प्रस्तुति देकर काशी विश्वनाथ को स्वरांजलि अर्पित की।
पद्मश्री माधवी मुदगल गंगा स्तवन से भगवान नटराज को संगीतांजली अर्पित करने के बाद उड़ीसा के विभिन्न पारंपरिक ताल वाद्यों पर आधारित वाद्य वैविध्य प्रस्तुत किया। अंत में राग मालिका में वल्लभाचार्य की रचना मधुराष्टकम प्रस्तुत कर निशा का समापन किया। दूसरी निशा का शुभारंभ संत रमेश भाई ओझा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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नूपुर जोशी ने राग गावति विलंबित तिलवाड़ा ताल में निबद्ध बंदिश प्रस्तुत किया। उसके बाद कर्नाटक संगीत शैली में उत्तकडु वेंकट कवि की रचना नटवर तारणी प्रस्तुत किया। इसके बाद ठुमरी में होरी गीत में तो खेलूंगी उनही से होरी गुइयां तथा अंत में भजन शिवरामा कृष्णा काशी विश्वनाथम की प्रस्तुति देकर काशी विश्वनाथ को स्वरांजलि अर्पित की।
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पद्मश्री माधवी मुदगल गंगा स्तवन से भगवान नटराज को संगीतांजली अर्पित करने के बाद उड़ीसा के विभिन्न पारंपरिक ताल वाद्यों पर आधारित वाद्य वैविध्य प्रस्तुत किया। अंत में राग मालिका में वल्लभाचार्य की रचना मधुराष्टकम प्रस्तुत कर निशा का समापन किया। दूसरी निशा का शुभारंभ संत रमेश भाई ओझा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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