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गुलाब की पंखुड़ियों संग बरसे सुर
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Sun, 27 Mar 2016 02:14 AM IST
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बनारस की मस्ती और नाजोअदा से परिचित कराती शनिवार की अनूठी शाम एक बार फिर लोगों के जेहन में रच बस गई। मौका था काशी की रवायतों में शुमार गुलाबबाड़ी महफिल का। मखमली घास पर बिछी चांदनी के बीच गुलाब की पंखुड़ियों की मादकता यह बताने के लिए काफी थी कि महफिलें बनारस की शान रही हैं। संगीत की उस लय को इस शहर की हर इंसान जीता है। खान-पान भी दिखा और ठसकमिजाजी की झलक भी मिली। एक ओर झिलमिलाता चांद था और दूसरी ओर सुर,लय, ताल की अठखेलियां। रवींद्रपुरी के नीलांबर में घास पर बिछी चांदनी और मसनद पर देश ही नहीं दुनिया भर के विदेशी संगीत प्रेमियों ने भी उन क्षणों को आत्मसात करने की कोशिश की। वायलिन-तबला, बांसुरी, सितार और मृदंगम पर रागों, धुनों पर लोग मुग्ध हुए तो पं. अजय चक्रवर्ती की बंदिशों पर झूम उठे।
संगीत के शहर में अपने तरह की इस खास महफिल का लुत्फ उठाने के लिए रईस घर-घर से निकले। घास पर बिछी चांदनी से लेकर फूलों, सजावटी पौधों की झाड़ियों तक डेलिया में गुलाब की पंखुड़ियां लेकर बच्चे उड़ेलते रहे। पुरुष लकदक कुरता-पायजामा, गुलाबी दुपट्टा में थे तो महिलाएं गुलाबी साड़ी में सज-धज कर गुलाबबाड़ी की शोभा बढ़ा रही थीं। संगीत के साथ ठंडई, मगही पान से लोगों का स्वागत किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के बाद शुरुआत हुई पं. सुखदेव मिश्र की वायलिन और पं. अशोक पांडेय के तबले पर जुगलबंदी से। राग हंस की अवतारणा हुई। अलाप, जोड़, झाला के बाद मध्य लय और द्रुत लय की बंदिशों पर बनारसबाज की खास शैली की झलक मिली। इसके बाद इन्होंने होरी की धुन बजाकर माहौल को खुशनुमा बनाया। बांसुरी पर अतुल शंकर सितार पर पूनम यादव और मृदंगम पर संगत की आदित्य कुमार ने।
इनके बाद बारी आई पं. अजय चक्रवर्ती की। उन्होंने राग ललित पंचम में अलापचारी की। एक ताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे- आयो मधुमास छाई बहार...। इसी राग में उन्होंने द्रुत लय की बंदिश- कूक सुनाए कोयलिया रुत आई फागुन की... की प्रस्तुति की। इस मौके पर मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव, विधायक श्याम देव राय चौधरी, विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव, पूर्व सांसद राजेश मिश्र, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, बिमला पोद्दार के अलावा बनारस घराने के कलाकार और संगीत प्रेमी उपस्थित थे। बनारस बीड्स के एमडी अशोक गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने आभार प्रकाश किया।
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संगीत के शहर में अपने तरह की इस खास महफिल का लुत्फ उठाने के लिए रईस घर-घर से निकले। घास पर बिछी चांदनी से लेकर फूलों, सजावटी पौधों की झाड़ियों तक डेलिया में गुलाब की पंखुड़ियां लेकर बच्चे उड़ेलते रहे। पुरुष लकदक कुरता-पायजामा, गुलाबी दुपट्टा में थे तो महिलाएं गुलाबी साड़ी में सज-धज कर गुलाबबाड़ी की शोभा बढ़ा रही थीं। संगीत के साथ ठंडई, मगही पान से लोगों का स्वागत किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के बाद शुरुआत हुई पं. सुखदेव मिश्र की वायलिन और पं. अशोक पांडेय के तबले पर जुगलबंदी से। राग हंस की अवतारणा हुई। अलाप, जोड़, झाला के बाद मध्य लय और द्रुत लय की बंदिशों पर बनारसबाज की खास शैली की झलक मिली। इसके बाद इन्होंने होरी की धुन बजाकर माहौल को खुशनुमा बनाया। बांसुरी पर अतुल शंकर सितार पर पूनम यादव और मृदंगम पर संगत की आदित्य कुमार ने।
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इनके बाद बारी आई पं. अजय चक्रवर्ती की। उन्होंने राग ललित पंचम में अलापचारी की। एक ताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे- आयो मधुमास छाई बहार...। इसी राग में उन्होंने द्रुत लय की बंदिश- कूक सुनाए कोयलिया रुत आई फागुन की... की प्रस्तुति की। इस मौके पर मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव, विधायक श्याम देव राय चौधरी, विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव, पूर्व सांसद राजेश मिश्र, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, बिमला पोद्दार के अलावा बनारस घराने के कलाकार और संगीत प्रेमी उपस्थित थे। बनारस बीड्स के एमडी अशोक गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने आभार प्रकाश किया।
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