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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: तीर्थ पुरोहित व उनकी पत्नी की हत्या का आरोपी दो दिन में करे समर्पण, 10 अप्रैल को सुनवाई
Sat, 09 Mar 2024 09:21 AM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sat, 09 Mar 2024 09:21 AM IST
सार
तीर्थ पुरोहित व उनकी पत्नी की हत्या के आरोपी की जमानत के आदेश पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आठ गवाह सुनवाई की अगली तिथि पर रहें मौजूद। ये पुलिस आयुक्त सुनिश्चित कराएं। वहीं कोर्ट ने आरोपी को दो दिन के अंदर समर्पण करने की बात भी कही।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
पिशाचमोचन कुंड के तीर्थ पुरोहित सरायगोवर्धन निवासी केके उपाध्याय और उनकी पत्नी ममता उपाध्याय के हत्यारोपी राजेंद्र उपाध्याय की जमानत के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरोपी दो दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करे।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि पुलिस आयुक्त यह सुनिश्चित कराएं कि इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार सहित मामले के आठ गवाह सुनवाई की अगली तारीखों पर ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहें। गवाहों के बयान समाप्त होने के बाद राजेंद्र को जमानत पर रिहा करने की वांछनीयता पर विचार किया जाएगा।
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केके उपाध्याय और पत्नी ममता की गोली मार कर 21 सितंबर 2019 को हत्या की गई थी। बेटे सुमित की हत्या का प्रयास किया गया था, लेकिन वह बच गया था।
सुमित की तहरीर पर चेतगंज थाने में चाचा राजेंद्र, चाची पूजा और चचेरे भाई रजत सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से राजेंद्र उपाध्याय फिलहाल जमानत पर था। राजेंद्र की जमानत के विरोध में सुमित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तिथि 10 अप्रैल नियत की है।
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इंस्पेक्टर प्रवीण पर कार्रवाई करें, हलफनामा दें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार का बयान दर्ज किया जा रहा था। हालांकि वह अचानक गायब हो गए और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी और उसके सह-अभियुक्त बहुत प्रभावशाली हैं या अभियोजन पक्ष उनके साथ है। वाराणसी के पुलिस आयुक्त प्रवीण कुमार के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करें। इस संबंध में एक अनुपालन हलफनामा भी पुलिस आयुक्त द्वारा दायर किया जाएगा।