{"_id":"63ad9e1f9f8faf41f60eedcd","slug":"supreme-court-justice-ps-narsimha-visit-sampurnanand-sanskrit-university-see-rare-manuscripts","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Varanasi: संपूर्णानंद विश्वविद्यालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति, दुर्लभ पांडुलिपियां देख हुए अभिभूत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi: संपूर्णानंद विश्वविद्यालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति, दुर्लभ पांडुलिपियां देख हुए अभिभूत
Thu, 29 Dec 2022 07:33 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Thu, 29 Dec 2022 07:33 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा गुरुवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे। सरस्वती भवन में रखी एक लाख से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा। न्यायमूर्ति ने कहा कि यहां की पांडुलिपियां अत्यंत दुर्लभ हैं।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा पहुंचे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन में रखी दुर्लभ पांडुलिपियां देखकर अभिभूत नजर आए। गुरुवार को उन्होंने सरस्वती भवन में रखी एक लाख से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा। यहां स्वर्णपत्र आच्छादित, लाक्षपत्र पर कमवाचा, स्वर्णाक्षरयुक्त रास पंचाध्यायी संरक्षित हैं।
विज्ञापन
इसके साथ ही वेद, कर्मकांड, वेदांत, सांख्य योग, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, मीमांसा, न्याय वैशेषिक, साहित्य, व्याकरण और आयुर्वेद की दुर्लभ पांडुलिपियां भी रखी गई हैं। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने न्यायमूर्ति का स्वागत किया। न्यायमूर्ति ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शास्त्रों से युक्त है। यहां की पांडुलिपियां अत्यंत दुर्लभ हैं।
विज्ञापन
इसके समुचित संरक्षण और अध्ययन की आवश्यकता है। कुलपति ने कहा कि धर्मशास्त्र और राजशास्त्र पर शीघ्र एक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रो. हरिशंकर पांडेय, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. राजनाथ, डॉ. पद्माकर मिश्र आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन