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चला गया ड्रिबलिंग का सुल्तान

Thu, 21 Jul 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 21 Jul 2016 02:14 AM IST
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Sultan went dribbling
मो. शाहिद।
आखिरकार मौत को ‘डॉज’ नहीं दे पाए हॉकी के सुल्तान मो. शाहिद। बुधवार सुबह उन्होंने गुड़गांव के मेदांता हास्पिटल में दुनिया को अलविदा कह दिया। 56 साल के शाहिद लिवर और किडनी में संक्रमण के चलते 29 जून से मेदांता हास्पिटल में भर्ती थे। देर शाम इंडिगो की फ्लाइट से उनका पार्थिव शरीर बाबतपुर हवाई अड्डे पहुंचा। यहां से उनके शव को कचहरी स्थित उनके पुश्तैनी मकान पर ले जाया गया। गुरुवार को टकटकपुर स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
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 1980 के मास्को ओलंपिक की स्वर्ण विजेता हॉकी टीम के सदस्य रहे शाहिद की मंगलवार रात नाजुक हो गई थी। कुछ समय के लिए डॉक्टरों ने उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा था। देर रात उनके शरीर के सभी अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। सुबह 10:25 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डीरेका में वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी के पद पर तैनात शाहिद बीते एक साल से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे। बीते 29 जून को उन्हें मेदांता में भर्ती कराया गया था। शाहिद के असामयिक निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खेल मंत्री विजय गोयल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शोक जताया है। साथ ही उनके निधन को भारतीय हॉकी के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। मालूम हो कि पिछले दिनों रियो ओलंपिक मेें हिस्सा लेने जा रही भारतीय हॉकी टीम ने अस्पताल में शाहिद से मुलाकात कर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी।
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पूर्व हॉकी ओलंपियन के निधन की यहां खबर फैलते ही उनके प्रशंसक मायूस हो गए। सबको उम्मीद थी कि दुनिया भर के दिग्गज खिलाड़ियों को मैदान पर चकमा देकर गोल दागने वाला हॉकी का यह जादूगर अपनी मौत को भी चकमा देकर लौटेगा, मगर ऐसा हो न सका। 1979 में मात्र 19 साल की आयु में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण करने वाले शाहिद ने जूनियर विश्व कप में फ्रांस के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं को खुश कर दिया था। इसके बाद उन्होंने मलयेशिया में चार देशों के टूर्नामेंट में उम्दा खेल का प्रदर्शन कर सुर्खियां बटोरी थीं। अपने खेल के दम पर ही उन्होंने 1980 में मास्को ओलंपिक के लिए चयनित टीम में जगह बनाई।
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भारत को ओलंपिक हॉकी का यहां आखिरी स्वर्ण मिला। 1981 में उन्हें अर्जुन अवार्ड और 1986 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। तीन बार ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले शाहिद लंबे समय तक भारतीय टीम के कप्तान भी रहे।पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान मो. शाहिद के निधन के चलते आज शहर में खेल की सारी गतिविधियां ठप रहीं। सिगरा स्टेडियम, शिवपुर मिनी स्टेडियम, लालपुर स्टेडियम, यूपी कॉलेज, बेनियाबाग मैदान, सनबीम अकादमी समेत शहर के सभी छोटे-बड़े खेल मैदानों पर खिलाड़ियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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