Varanasi: बीएचयू सिंहद्वार पर छात्रों का प्रदर्शन शुरू, 13 छात्रों के निलंबन का आदेश वापस लेने की मांग
बीते दिन बीएचयू के 13 छात्रों के निलंबन का मामला अब और भी गर्म होने लगा है। बीएचयू सिंहद्वार पर छात्र संगठनों से जुड़े हुए छात्र प्रदर्शन कर बीएचयू प्रशासन से निलंबित छात्रों की बहाली की मांग कर रहे हैं। आज के प्रदर्शन में दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू के छात्र भी विरोध में इनके साथ आ गए हैं। सुरक्षा तंत्र ने अपने कान खड़े कर लिए हैं।
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बीएचयू के निलंबित 13 छात्रों के समर्थन में जेएनयू और लखनऊ से कैंपस में आए नेताओं का गुस्सा फूटा। सोमवार को न्याय मार्च और सभा के दौरान 500 से ज्यादा छात्र और नेता सिंह द्वार पर उमड़े थे। हाथ में आईआईटी-बीएचयू गैंगरेप के आरोपियों की तस्वीरें और संविधान के कवर की एक प्रतीकात्मक कॉपी लेकर नारेबाजी कर रहे थे। लगातार दो घंटे तक एक सुर में छात्र और छात्राओं का निलंबन वापस लेने की मांग करते रहे। कहा कि बीएचयू प्रशासन या तो इन छात्रों का निलंबन वापस ले या एक लंबी लड़ाई को तैयार रहे।
बीएचयू गेट पर सभा के बाद छात्रों ने लंका गेट से रविदास गेट होते हुए वापस लंका तक न्याय मार्च निकाला। इस दौरान लंका से लेकर आईएमएस गेट और आसपास की सड़कों पर भयानक जाम लग गया। सुरक्षा व्यवस्था न बिगड़े, एहतियान तीन ट्रक भरकर आरआरएफ जवानों को तैनात कर दिया गया था। इस दौरान तमाशबीन भी वहां खड़े दिखे।
आपको बता दें कि बीएचयू में छात्रों के निलंबन के बाद लगातार उनकी बहाली की मांग को लेकर छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं अब अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस प्रदर्शन से जुड़ रहे है। सूत्रों की माने तो प्रदर्शन को लेकर सुरक्षातंत्र ने अपने कान खड़े कर लिए हैं।
समर्थन में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष धनंजय, महानगर कांग्रेस कमेटी से राजेश्वर पटेल, राघवेंद्र चौबे, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी आए थे। इनके साथ ही समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह, विधायक प्रभुनारायण, जूही सिंह, नेहा यादव, रीबू श्रीवास्तव, सुजीत यादव लक्कड़, प्रभु नारायण सिंह यादव आदि नेता छात्रों को समर्थन देने पहुंचे थे।
मारपीट के मामले में हुए हैं निलंबित
बीते साल 1 नवंबर की रात आईआईटी-बीएचयू में सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में पांच नवंबर को सिंह द्वार पर एबीवीपी और आईसा-बीएसएम छात्रों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इस मामले में कई छात्रों पर मुकदमा दर्ज हुआ और घटना के 330 दिन बाद 26 सितंबर को 13 स्टूडेंट्स को एक महीने से लेकर 15 दिनों के लिए निलंबित किया गया। निलंबन के साथ उन्हें हॉस्टल और लाइब्रेरी की सुविधा से भी वंचित किया गया।
छात्र बोले- उन्हें आदतन अपराधी कहा गया
बीएचयू के पूर्व एनएसयूआई अध्यक्ष रोहित राणा ने कहा कि आईआईटी बीएचयू में गैंगरेप के आरोपियों की मांग करने वालों को ही निलंबित कर दिया गया। इन स्टूडेंट्स को अशिष्ट, आदतन अपराधी या हैबिचुअल ऑफेंडर और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला कहा गया।
जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष धनंजय ने कहा कि जिन छात्रों को निलंबित किया गया है, उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। एकेडमिक जगहों पर ऐसा कृत्य ठीक नहीं। दुष्कर्म का विरोध करने वालों पर उलटा एक्शन लिया जा रहा है। कांग्रेस नेता संजीव ने कहा कि बीएचयू में ईसी नहीं है, लेकिन निलंबन की कार्रवाई कर दी जा रही है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा, छात्रों को यह वचन देना चाहता हूं कि कोई भी समस्या हो मैं आपके साथ रहूंगा। प्रशासन का कोई व्यक्ति आपकी आवाज दबाए या धमकाए तो बीएचयू आ जाऊंगा।
संसद में उठेगा ये मुद्दा, भले ही मैं निलंबित हो जाऊं
चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी छात्रों के नैतिक बल को कमजोर नहीं होने देगी। मैं भले ही सदन से निलंबित जो जाऊं लेकिन इस मुद्दे को सदन में उठाऊंगा। समाजवादी महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के प्रति सरकार का रवैया उदासीन है। निलंबित छात्रा चंदा ने कहा कि एक-एक छात्र पर विश्वविद्यालय ने कई-कई एक्ट लगाए हैं। जो छात्र धरने में था ही नहीं उसकी शिकायत पर एसी/एसटी मुकदमा किया गया।