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UP: हैदराबाद विवि में साहित्यकार नीरजा का छात्रों ने किया विरोध, कार रोक कर बोले- माफी मांगो; जानें मामला

Thu, 22 Jan 2026 03:17 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 22 Jan 2026 03:17 PM IST
सार

Varanasi News: कार्यक्रम में प्रश्न काल के दौरान एक छात्रा ने जब उनसे अंग्रेजी में प्रश्न करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि आप हिंदी की विद्यार्थी हैं तो मुझसे हिंदी में बात करिए। इस पर भी उस छात्रा ने प्रतिरोध किया।

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Students protest against writer Neerja at Hyderabad University stop car and demand an apology
सेमिनार में नीरजा माधव और हंगामा करते छात्र। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिंदी भाषा के प्रति घृणा की एक अफसोसनाक मिसाल विगत दिनों 20 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित सेमिनार में देखने को मिली। डॉ. नीरजा माधव को थर्ड जेंडर विमर्श पर व्याख्यान देने हेतु हैदराबाद विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया गया था। वहां पहुंचने पर आयोजकों ने नीरजा माधव से अनुरोध किया कि वे भारतीय संस्कृति पर भी अपना एक व्याख्यान दें। 

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भारतीय संस्कृति और थर्ड जेंडर विषय पर व्याख्यान देने के बाद प्रश्न उत्तर काल में उपस्थित कुछ छात्रों ने होमो सेक्सुअल और लेस्बियन पर आधारित प्रश्न करते हुए कहा कि मनुस्मृति में समलैंगिकता का संदर्भ है, जिसके आधार पर उन्हें कानूनी मान्यता मिली है। उनके प्रश्न का जवाब देते हुए नीरजा माधव ने जब कहा कि लेस्बियन और होमोसेक्सुअलिटी किसी की मानसिक आवश्यकता हो सकती है। आपकी अपनी इच्छा भी  हो सकती है, लेकिन यह थर्ड जेंडर जैसी समस्या नहीं है।  थर्ड जेंडर प्रकृति के एक क्रूर मजाक के कारण अभिशप्त जीवन जीते हैं। 
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नीरजा माधव ने सभागार में उपस्थित छात्रों से यह भी पूछा कि आप लोगों में से ओरिजिनल मनुस्मृति को किसने पढ़ा है, कृपया हाथ उठाएं। कोई हाथ नहीं उठा। किसी ने नहीं पढ़ा था। नीरजा माधव ने कहा कि किसी भी पुस्तक, ग्रंथ या शास्त्र का खंडन करने से पहले उसका अध्ययन करना आवश्यक होता है।

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सत्र समाप्त होते ही हंगामा

सत्र समाप्त होने के एक घंटे के भीतर ही विश्वविद्यालय के आइसा और एसएफआई संगठन के सैकड़ों छात्रों ने हाथों में बैनर लहराते हुए नारे लगाते हुए नीरजा माधव की कार को घेर लिया और उनसे माफी मांगने की जिद करने लगे। नीरजा माधव ने कार से निकलकर उनकी इस मांग का प्रतिरोध किया और कहा कि जब मैंने कोई गलत बात कही ही नहीं तो फिर किस बात के लिए माफी? 

यह तो संभव ही नहीं है कि मैं माफी मांगू। मैंने जो भी बातें कही हैं, वह सत्य कहीं हैं। आपकी असहमति हो सकती है। इस पर छात्र उग्र होकर मोदी विरोधी, संघ विरोधी और मनुस्मृति विरोधी नारे लगाने लगे। 15-20 मिनट के अंदर वहां विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में आए और नीरजा माधव की कार को सुरक्षित निकलवाया। 

यह भी ज्ञातव्य है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में आज तक किसी भी भारतीय संस्कृति के लेखक या वक्ता को इस वामपंथी विचारधारा के लोगों ने  मंच से कुछ बोलने नहीं दिया है। यह पहला अवसर था जब नीरजा माधव ने वहां मंच से आइसा और एसएफआई के छात्रों के बीच भी भारतीय संस्कृति की बातें पुरजोर ढंग से रखीं। 

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