आईआईटी बीएचयू: पहली बार प्रवेश लिए छात्रों की होगी यूरिन आधारित ड्रग जांच, नौ सदस्यीय जांच समिति गठित
आईआईटी बीएचयू में पहली बार प्रवेश लेने वाले छात्रों की यूरिन आधारित ड्रग जांच होगी। अधिकारियों के अनुसार पहली बार संस्थान में इस तरह की जांच हो रही है। इसके लिए नौ सदस्यीय ड्रग जांच समिति गठित की गई है।
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आईआईटी बीएचयू में पहली बार प्रवेश लिए छात्रों की यूरिन आधारित ड्रग जांच होगी। आईआईटी, बीएचयू के प्रोफेसरों और आईएमएस के डॉक्टरों के साथ नौ सदस्यीय ड्रग जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति तत्काल प्रभाव से संस्थान के नव प्रवेशित छात्रों के स्क्रीनिंग की व्यवस्था का काम देखेगी। अधिकारियों की मानें तो पहली बार संस्थान में इस तरह की जांच हो रही है। कुलसचिव कार्यालय के अनुसार शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर इस तरह की जांच कराई जानी है।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। शैक्षणिक कार्य अधिष्ठाता प्रो. देवेंद्र सिंह और सह अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) डॉ. मेघा झा सदस्य हैं। इस जांच के दायरे में बीटेक, एमटेक, आईडीडी और पीएचडी के वे छात्र आएंगे, जिन्होंने इस सत्र में ही प्रवेश लिया है। इसमें करीब 1550 छात्र बीटेक और बाकी 700 से ज्यादा अन्य कोर्स के छात्र हैं।
अन्य सदस्यों में सह अधिष्ठाता प्रो. अभिषेक कुमार श्रीवास्तव और संकाय समन्वयक डॉ. अजीत कुमार मिश्रा भी सदस्य के रूप में शामिल हैं। आईएमएस बीएचयू के फर्माकोलॉजी विभाग से प्रो. किरण गिरी और जैव रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश पातुरकर भी समिति में हैं। पैथोलॉजी विभाग से डॉ. दीपा रानी और संयोजक तुषार भी सदस्य बनाए गए हैं।
गांजा सहित प्रतिबंधित पदार्थों का लगता है पता
मेडिकल साइंस कहता है कि इस तरह की जांच शरीर में कुछ विशिष्ट नशीले या प्रतिबंधित पदार्थों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए की जाती है। कई बार खेल, रोजगार और कानूनी वजहों से की जाती है। आईएमस बीएचयू में मेडिसीन विभाग के चिकित्सक ओ. नीलेश कुमार के अनुसार, अवैध ड्रग का पता लगाने के लिए यूरिन का सैंपल लेकर जांच किया जाता है। प्रेसक्रिप्शन या फिर मेडिकेशन के आधार पर भी ये जांच हो सकती है। इससे गांजा, कोकीन सहित कई तरह के नशे का पता लगाया जाता है।