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कोरोना ने बिगाड़ा खेल, प्रतिभा दिखाने से चूके खिलाड़ी
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वाराणसी। कोरोना काल में खेल विभाग, स्कूल खेल संघों और विश्वविद्यालयों की रद्द हो रही प्रतियोगिताएं बढ़ती उम्र के खिलाड़ियों के चिंता का विषय बनी हुई है। उम्र के आगे कई खिलाड़ियों को अपने खेल कॅरियर की अंतिम नेशनल प्रतियोगिताएं भी खेलने को नहीं मिल सकीं। आगे भी कई खिलाड़ियों को छूटने के डर सता रहा है।
खेल विभाग के वार्षिक कलेंडर के मुताबिक, अगस्त से अक्टूबर माह तक 25 वर्ष से कम उम्र की महिला खिलाड़ियों के लिए तैराकी, टेबल टेनिस, बास्केटबाल, हैंडबाल, कबड्डी, जिमनास्टिक, खोखो, वॉलीबाल, टेनिस, हॉकी, एथलेटिक्स, और बैडमिंटन की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए तहसील स्तर, जिला स्तर और मंडल स्तर पर ट्रायल होता है। मगर इस वर्ष कोरोना काल में अगस्त का आधा माह निकल गया। इस बीच कोई खेल गतिविधि नहीं हो सकी। ऐसे में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होना भी संभव नहीं। स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों की भी लगभग यही स्थिति है।
छितूपुर निवासी फुटबालर विकास पाल ने बताया वो इस वर्ष स्कूली सुब्रत कप के लिए अंडर 17 टीम का नेतृत्व करने वाले थे। मगर इस वर्ष स्कूल की तरफ से कोई खेल गतिविधि न होने से कप के होने की कोई संभावना नहीं। जो अगले साल अधिक 18 वर्ष की उम्र होने पर हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
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बच्छाव की रहने अंडर 17 खोखो टीम की खिलाड़ी कविता पटेल ने बताया कि इस वर्ष वो खेलो इंडिया यूथ 2019-20 के लिए चयनित थी जो कोरोना के वजह रद्द हो गया। अगले साल 18 वर्ष की होने के बाद खेलने का मौका नहीं मिलेगा।
सुंदर पुर की कबड्डी खिलाड़ी श्वेता पटेल ने बताया कि इस वर्ष खेल विभाग द्वारा 25 साल से उम्र की महिलाओं के लिए आयोजित स्टेट स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आखरी मौका था। मगर वह इस वर्ष कोरोना के कारण नहीं खेल पाई।
स्कूल बंद है निदेशालय से भी कोई गाइडलाइन नहीं आई। ऐसे में कोई भी खेल गतिविधियों का आयोजन संभव नहीं। -आरपी सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
किसी खेल का आयोजन संभव नहीं है। अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए आखरी मौका उनके हाथ से निकल जाएगा। - बीसी कापड़ी, महासचिव, बीएचयू खेल परिषद
अभी खेल प्रतियोगिता का वार्षिक कैलेंडर जारी नहीं हुआ है। इसलिए किसी खेल प्रतियोगिता के होने संभावना नहीं। -प्रो संतोष कुमार, सचिव, काशी विद्यापीठ
इस वर्ष किसी प्रकार की कोई प्रतियोगिता का हो पाना संभव नहीं है। -गोपाल प्रसाद, प्रशिक्षक, भारतीय सेवक संस्थान इंटर कॉलेज
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खेल विभाग के वार्षिक कलेंडर के मुताबिक, अगस्त से अक्टूबर माह तक 25 वर्ष से कम उम्र की महिला खिलाड़ियों के लिए तैराकी, टेबल टेनिस, बास्केटबाल, हैंडबाल, कबड्डी, जिमनास्टिक, खोखो, वॉलीबाल, टेनिस, हॉकी, एथलेटिक्स, और बैडमिंटन की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए तहसील स्तर, जिला स्तर और मंडल स्तर पर ट्रायल होता है। मगर इस वर्ष कोरोना काल में अगस्त का आधा माह निकल गया। इस बीच कोई खेल गतिविधि नहीं हो सकी। ऐसे में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होना भी संभव नहीं। स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों की भी लगभग यही स्थिति है।
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छितूपुर निवासी फुटबालर विकास पाल ने बताया वो इस वर्ष स्कूली सुब्रत कप के लिए अंडर 17 टीम का नेतृत्व करने वाले थे। मगर इस वर्ष स्कूल की तरफ से कोई खेल गतिविधि न होने से कप के होने की कोई संभावना नहीं। जो अगले साल अधिक 18 वर्ष की उम्र होने पर हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
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बच्छाव की रहने अंडर 17 खोखो टीम की खिलाड़ी कविता पटेल ने बताया कि इस वर्ष वो खेलो इंडिया यूथ 2019-20 के लिए चयनित थी जो कोरोना के वजह रद्द हो गया। अगले साल 18 वर्ष की होने के बाद खेलने का मौका नहीं मिलेगा।
सुंदर पुर की कबड्डी खिलाड़ी श्वेता पटेल ने बताया कि इस वर्ष खेल विभाग द्वारा 25 साल से उम्र की महिलाओं के लिए आयोजित स्टेट स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आखरी मौका था। मगर वह इस वर्ष कोरोना के कारण नहीं खेल पाई।
स्कूल बंद है निदेशालय से भी कोई गाइडलाइन नहीं आई। ऐसे में कोई भी खेल गतिविधियों का आयोजन संभव नहीं। -आरपी सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
किसी खेल का आयोजन संभव नहीं है। अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए आखरी मौका उनके हाथ से निकल जाएगा। - बीसी कापड़ी, महासचिव, बीएचयू खेल परिषद
अभी खेल प्रतियोगिता का वार्षिक कैलेंडर जारी नहीं हुआ है। इसलिए किसी खेल प्रतियोगिता के होने संभावना नहीं। -प्रो संतोष कुमार, सचिव, काशी विद्यापीठ
इस वर्ष किसी प्रकार की कोई प्रतियोगिता का हो पाना संभव नहीं है। -गोपाल प्रसाद, प्रशिक्षक, भारतीय सेवक संस्थान इंटर कॉलेज