फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Special temple in kashi pushpadanteshwar mahadeva devotees worship sawan

काशी के खास मंदिर: चढ़े हुए फूलों को रौंदने के दोष दूर करते हैं पुष्पदंतेश्वर, खत्म होते हैं जन्म-जन्म के पाप

Fri, 09 Aug 2024 12:15 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 09 Aug 2024 12:15 PM IST
सार

Varanasi News: काशी के कण-कण में बसने वाले शंकर की महिला निराली है। शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट और पाप दूर हो जाते हैं। इन्हीं में से एक हैं पुष्पदंतेश्वर महादेव। आइए जानते हैं इनकी महिमा...

विज्ञापन
Special temple in kashi pushpadanteshwar mahadeva devotees worship sawan
पुष्पदंतेश्वर महादेव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी का कण-कण भक्तों का कल्याण करता है। भगवान शिव की महिमा का ही प्रताप है कि मोक्षदायिनी काशी मनुष्यों के हर पाप को नष्ट कर देती है। कुछ ऐसे ही फल देने वाले हैं पुष्पदंतेश्वर महादेव। पुष्पदंतेश्वर महादेव जन्म-जन्म के पापों के साथ ही सात पीढि़यों का उद्धार करते हैं। यही नहीं भूलवश पूजा के फूलों को पैरों तले रौंदने के दोष को भी दूर कर देते हैं।

विज्ञापन


मंदिर के पुजारी सूरज प्रसाद ने बताया कि गंधर्वराज पुष्पदंत ने शिव महिमा स्तोत्र की रचना की और उन्होंने ही अगस्त्यकुंड के पास पुष्पदंतेश्वर महादेव की स्थापना की थी। पुष्पदंत ने मोह में आकर फूलों को चोरी करने का पाप किया था। 
विज्ञापन




उसी पाप का प्रायश्चित करने के उद्देश्य से वह आनंदकानन काशी आए और भगवान शिव की तपस्या करने लगे। शिव महिमा स्तोत्र करते-करते वह तपस्या में लीन हो गए। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें पापमुक्त करके देवयोनि का वरदान दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्लोक के अनुसार जन्म जन्म कृतम पापम दर्शन विनष्यति...अर्थात पुष्पदंतेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से जन्म-जन्म के पापों का नाश हो जाता है। जो भी भक्त शिव महिमा स्तोत्र से पुष्पदंतेश्वर की आराधना करता है, उसकी सात पीढि़यों का उद्धार हो जाता है और वह कई जन्मों के पाप से मुक्त हो जाता है। 

पुष्पदंतेश्वर महादेव का मंदिर पातालेश्वर में विराजमान है। इनका वर्णन लिंग पुराण, कूर्म पुराण में भी मिलता है। शिवपुराण की रुद्र संहिता के अनुसार दैत्यराज पंचचूर्ण के वध के लिए भगवान शिव ने पुष्पदंत को अपना दूत बनाकर उनके पास भेजा था। 


पंचचूण के वध के उपरांत शिव ने जिस स्थान पर अपना त्रिशूल स्थापित किया था, वहीं इस मंदिर का निर्माण हुआ। मान्यता है किसी देव स्थान में चढ़े हुए पुष्प, माला, अक्षत, जल पर यदि भूलवश पैर लग जाते हैं तो और उसका दोष लगता है, पुष्पदंतेश्वर महादेव के दर्शन से यह दोष समाप्त हो जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed