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Special Report : वाराणसी में एक श्रीलंका..., यहां के ग्रामीण मांग रहे पक्का पुल; चंदा जुटा करते हैं निर्माण

Wed, 25 Dec 2024 10:24 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमन विश्वकर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमन विश्वकर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 25 Dec 2024 10:24 AM IST
सार

Varanasi News : वाराणसी के दानियालपुर की जमीनें खेती-बारी की दृष्टि से भी काफी उपजाऊं हैं, लेकिन इस समस्या के कारण ग्रामीण हर वक्त परेशान रहते हैं। खास बात यह है कि पुल न रहने से इनके बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए झनकना पड़ता है। सायकिल से उन्हें सात से आठ किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल जाना पड़ रहा है।

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Special Report Sri Lanka in Varanasi villagers demanding concrete bridge collect funds every year
इस पुल के गिर जाने के कारण लड़कियां नहीं जा पा रहीं स्कूल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ई पुल बन गयल होत त गुलाब राजभर क पतो मोना (24) बच गयल होतीन। फुलवरिया जाय बदे ओनकरे परिवार क लोगन पिसौर पुले से होके अस्पताल लेके गइलन। मोना के बच्चा ते पैदा हो गयल लेकिन ओन ना बच पइलिन। दनियालपुर जब से टूटल हौ तब से पूरा गांव क मनई परेसान हो गयल हउवन...।

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यह कहते-कहते 61 वर्षीय मुनकी दानियालपुर-फुलवरिया पुल की ओर देखने लगती हैं, जो दुर्गंध मार रहे वरुणा नदी पर थी। वह टूट चुकी थी। बांस-बल्ली और लकड़ियों को नदी का पानी बहा ले गया था। पुल का आधा हिस्सा नदी में ही टंगा हुआ है। उधर, गांव वाले हर साल की भांति इस साल भी चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। जल्द ही पुल को इस बार भी बना लिया जाएगा तो गांव वालों को स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं सुचारू रूप से मिलने लगेंगी। गांव के लोग आज भी पक्का या पीपा पुल का सपना देख रहे हैं।
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दानियालपुर गांव में मात्र एक प्राइमरी स्कूल है। गांव के लड़के और लड़कियां फुलवरिया के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, लेकिन इस पुल (चहवा) के टूट जाने से उनकी पढ़ाई-लिखाई के साथ ही अन्य काम भी प्रभावित हो रहे हैं। गांव के 66 वर्षीय शहादुल पटेल ने बताया कि जिन्हें सायकिल चलाने नहीं आती वे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। यहां अधिकतर लड़कियां सायकिल नहीं चला पातीं, इसलिए वे भी घर पर बैठ गई हैं। इस वक्त अन्य बच्चे पिसौर पुल से स्कूल जा रहे हैं, लेकिन उन्हें सात से आठ किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है।

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यहां पर वरुणा नदी का पानी भी गंदा रहता है। - फोटो : अमर उजाला

गांव की अनोखी विशेषता
इस गांव को श्रीलंका का टापू भी कहा जाता है, क्योंकि इसके पूरब-पश्चिम और दक्षिण की तरफ वरुणा नदी बहती है। उत्तर की तरफ शिवपुर रेलवे स्टेशन है। हर साल जुलाई के बाद यह पुल बारिश के कारण बह जाता है। तीन-चार महीने के बाद इसे दोबारा बनाया जाता है। गांव वाले चंदा इकट्ठा करते हैं। बंसवाड़ी से बांस काट बजरिए वाहन नदी किनारे लाकर 15-20 दिन में इस चहवा को तैयार किया जाता है, जिसका काम अब शुरू हो चुका है।

पिसाैर वार्ड नंबर 49 के पार्षद गोविंद पटेल ने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2019 में सेतु निगम ने पुल के लिए सर्वे किया था। लेखपाल ने सीमांकन किया। निशान भी बना दिए गए, लेकिन कुछ महीने बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वे बताते हैं कि दानियालपुर पांच से छह किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां की आबादी तकरीबन छह से सात हजार है। इस पुल के माध्यम से यहां के लोगों को काफी सहूलियत हो जाती है। उन्होंने बताया कि इसके प्रस्ताव को नगर निगम में पेश किया जाएगा।

गांव के क्षेत्रफल के हिसाब से यहां के लोगों ने एक राजकीय विद्यालय और खेलकूद के मैदान की भी मांग की है। पार्षद ने बताया कि गांव वालों ने अपनी काफी जमीनों को यहां के विकास के लिए दे दिया। यही कारण है कि यहां पिच-सीसी रोड और इंटरलाॅकिंग का कार्य हो सका। गांव में अभी तक चकबंदी नहीं हुई है। यहां काफी जमीनें हैं, जहां स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र खोले जा सकते हैं। जल्द ही इस पर भी काम किया जाएगा।

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दानियालपुर से फुलवरिया जाने के लिए तय करना पड़ता है सात से आठ किलोमीटर का रास्ता। - फोटो : अमर उजाला

वरुणा के पानी से उठती है दुर्गंध
तीनों तरफ वरुणा नदी से घिरे दानियालपुर गांव के कई खेत बाढ़ में डूब जाते हैं। बाढ़ जाने के बाद यहां की स्थिति और भी बद्तर हो जाती है। हर वक्त पानी में दुर्गंध उठती रहती है। इसका कारण पूछने पर गांव के सूरज, चंद्रप्रकाश, अनिल, राजू, खरपत्तू सहित कई महिलाओं ने बताया कि भिटारी के पास रेलवे का कारखाना है, जहां से भारी मात्रा में गंदगी वरुणा में ही गिराई जाती है। सारी गंदगी नदी के मोढ़ पर इकट्ठा हो जाती है। इस कारण मछलियां तो मरती ही हैं, साथ ही पानी भी गंध मारने लगता है।

क्या कहते हैं सांसद
चंदाैली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने बताया कि शिवपुर विधानसभा के इस गांव की समस्या के बारे में मुझे जानकारी है। 2007 में मैंने ही यहां बांस की पुलिया बनवाई थी। इससे लोगों को काफी लाभ हुआ इसलिए हर साल चंदा इकट्ठा कर गांव वाले इसे बनवा रहे हैं। यह मामला विधानसभा से जुड़ हुआ है, फिर भी गांव के लोगों का मुझसे काफी जुड़ाव है। मैं इसको संज्ञान में लेकर संबंधित लोगों से बातचीत कर यहां पक्का या पीपा पुल का निर्माण करवाने की कोशिश करूंगा। उन्होंने कहा कि रेलवे से गंदगी वाली जो समस्या है, इसकी जांच कर समाधान करवाउंगा।

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