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मदर्स डे पर खास : संघर्षों के बल पर इस मां ने लिखी सफलता की इबारत

Sun, 14 May 2017 02:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Sun, 14 May 2017 02:39 PM IST
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Special on Mother's Day: This mother wrote the success story on her strength
जयमाला यादव - फोटो : अमर उजाला

जौनपुर के करंजाकला विकास खंड के जासोपुर चकिया गांव की रहने वाली 55 वर्षीय जयमाला यादव आर्थिक तंगी समेत तमाम विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। अपने खुद के संघर्षों के बल पर उन्होंने एक बेटे के डाक्टर तो दूसरे को प्रोफेसर बनाया है।

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बेटी भी बेसिक शिक्षा परिषद में शिक्षक है। बड़ा बेटा जब इंटर में पढ़ाई करता था उसी दौरान जयमाला के पति हरदेव यादव की मौत हो गई। गंभीर बीमारी के चलते इलाज में के लिए वह कर्ज में डूब गईं। लेकिन बिपरीत परिस्थितियों में भी बेटों की पढ़ाई जारी रखी और अपने संघर्षों की बदलौत सफलता की इबारत लिख डाली।

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जयमाला यादव के पति हरदेव यादव ग्वालियर में एक कालीन कंपनी में नौकरी करते थे। लेकिन वह नौकरी के दौरान ही गंभीर बीमारी के शिकार हो गए। बीमारी से अपंग होने के कारण साढ़े सात साल चारपाई पर ही पड़े रहे। उनके इलाज में परिवार पर कर्ज भी हो गया और पति की मौत हो गई।

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ऐसी विपरीत परिस्थितियों में बेटों की आगे की पढ़ाई के लिए उनके पास पैसों का इंतजाम नहीं था। जयमाला ग्वालियर शहर को छोड़कर घर आ गई। घर पर अपने हिस्से की जमीन में खेती करना शुरू किया। और बच्चों का हौसला बढ़ाती रहीं। होनहार बेटे भी मां के सपने को साकार करने के लिए परिश्रम करते रहे।

आखिरकार बड़ा बेटा बृजेश यादव एमबीबीएस एमडी की डिग्री हासिल कर ली। वह मध्यप्रदेश के दमाम शहर में सरकारी अस्पताल में तैनात हैं। जबकि छोटा बेटा उमेश यादव झांसी के एक डिग्री कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात है।


बेटी रीनू यादव बेसिक शिक्षा परिषद में शिक्षक के पद पर तैनात है। जयमाला कहती हैं कि बेटों के कठिन परिश्रम की बदौलत ही उनका हौसला विपरीत परिस्थितियों में भी बढ़ता रहा। उन्हें पूरा भरोसा था कि बेटा कामयाब जरूर होगा। इसलिए उन्हें पढ़ाई के लिए कर्ज लेने में भी कोई मश्किल नहीं हुई।

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