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सत्य बोलें, मगर ऐसा कि किसी के लिए विपत्ति न बने : मुनि भाव सागर
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दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन रविवार को भेलूपुर स्थित श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ में उत्तम सत्य धर्म की आराधना हुई। मुनि धर्म सागर और मुनि भाव सागर के सान्निध्य में मांगलिक क्रियाओं के साथ दशलक्षण विधान किया गया। इस दौरान महातीर्थ यात्रा की डिजिटल डायरेक्टरी का विमोचन भी हुआ, जिसके माध्यम से देशभर में प्रमुख जैन तीर्थों की जानकारी और महिमा डिजिटल माध्यम से पहुंचाई जाएगी।
मुनि भाव सागर महाराज ने कहा कि असत्य अनेक परेशानियों का कारण बनता है, जबकि सत्य का आचरण बुद्धि का विकास करता है। सत्य बोलना जरूरी है, लेकिन वाणी ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी के लिए विपत्ति खड़ी न हो। उन्होंने कहा कि बोलने की शक्ति किसी वरदान से कम नहीं है। शब्दों के सही प्रयोग से कड़वाहट को मिठास में बदला जा सकता है और परिवार, समाज, देश व विश्व में बेहतर वातावरण बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे वचनों का प्रयोग करना चाहिए, जिनसे सामने वाले को सुकून मिले। जैन मान्यता के अनुसार असत्य का प्रभाव अज्ञानता और मुख संबंधी विकारों के रूप में भी सामने आता है। सत्यनिष्ठ व्यक्ति के जीवन में ज्ञान और विवेक का प्रकाश रहता है। सत्य के आचरण से वाणी में प्रभाव आता है और व्यक्ति की कीर्ति भी फैलती है। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज काशी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि जैन संतों के सान्निध्य में महातीर्थ यात्रा की डिजिटल डायरेक्टरी का विमोचन किया गया। इसमें श्री सम्मेद शिखर जी, पंचमहातीर्थ और वाराणसी के जैन तीर्थों की जानकारी शामिल है। इसे डिजिटल माध्यम से देशभर में प्रसारित कर तीर्थों की महिमा और धार्मिक महत्व से लोगों को परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जैन समाज के अध्यक्ष आरसी जैन ने की। विनोद कुमार जैन, किशोर जैन, राहुल जैन, आशीष जैन, सौरभ जैन, प्रमिला सामरिया, किरण जैन, चंदा भैया सहित समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।
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मुनि भाव सागर महाराज ने कहा कि असत्य अनेक परेशानियों का कारण बनता है, जबकि सत्य का आचरण बुद्धि का विकास करता है। सत्य बोलना जरूरी है, लेकिन वाणी ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी के लिए विपत्ति खड़ी न हो। उन्होंने कहा कि बोलने की शक्ति किसी वरदान से कम नहीं है। शब्दों के सही प्रयोग से कड़वाहट को मिठास में बदला जा सकता है और परिवार, समाज, देश व विश्व में बेहतर वातावरण बनाया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि ऐसे वचनों का प्रयोग करना चाहिए, जिनसे सामने वाले को सुकून मिले। जैन मान्यता के अनुसार असत्य का प्रभाव अज्ञानता और मुख संबंधी विकारों के रूप में भी सामने आता है। सत्यनिष्ठ व्यक्ति के जीवन में ज्ञान और विवेक का प्रकाश रहता है। सत्य के आचरण से वाणी में प्रभाव आता है और व्यक्ति की कीर्ति भी फैलती है। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज काशी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि जैन संतों के सान्निध्य में महातीर्थ यात्रा की डिजिटल डायरेक्टरी का विमोचन किया गया। इसमें श्री सम्मेद शिखर जी, पंचमहातीर्थ और वाराणसी के जैन तीर्थों की जानकारी शामिल है। इसे डिजिटल माध्यम से देशभर में प्रसारित कर तीर्थों की महिमा और धार्मिक महत्व से लोगों को परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जैन समाज के अध्यक्ष आरसी जैन ने की। विनोद कुमार जैन, किशोर जैन, राहुल जैन, आशीष जैन, सौरभ जैन, प्रमिला सामरिया, किरण जैन, चंदा भैया सहित समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।
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