कर्ज लेकर की बुआई, फसल हुई बर्बाद, अब कैसे कर पाएंगे भरपाई
बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि ने फसलें बर्बाद कर दी हैं। किसी किसान ने बैंक से कर्ज लेकर बुआई की थी तो किसी ने परिचितों से उधार लिया है। अब वह परेशान है कि कैसे वह कर्ज की भरपाई करेंगे।
वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के कादीपुर कलां निवासी राघवेंद्र नारायण पांडेय भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि चौबेपुर इलाहाबाद बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेकर 12 बीघा गेहूं व चना की बुआई की थी।
तेज हवा व पानी के चलते दोनों फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। अब समझ नहीं आ रहा है कि कैसे कर्ज की भरपाई करेंगे। यही हाल गरथौली के किसान संतोष सिंह का है। उन्होंने कहा कि आठ बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। फसल गिर गई है, इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। सरसों, चना, अरहर व आम के बौर का भी काफी नुकसान हुआ है। इलाहाबाद बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड से जरिए कर्ज लिया। अब तो लागत निकलनी भी मुश्किल है।
मिर्जामुराद क्षेत्र के अदमापुर निवासी सत्यनारायण पटेल व अमीनी निवासी ओमप्रकाश पटेल ने बताया कि बरसात व ओलावृष्टि के कारण उनकी गेहूं, चना, सरसों व अरहर की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। पिंडरा के किसान हरिशंकर सिंह ने कहा कि बारिश और ओलाबृष्टि ने चना, अरहर, मसूर और गेहूं के उत्पादन पर असर पडे़गा।
फसलों को 50 प्रतिशत तक नुकसान
दो दिन बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने फसलों पर आफत बरसाई है। जिले भर में 50 फीसदी तक फसलों को नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है। इसके अलावा रबी की फसल चना, मटर, सरसों, अरहर तथा सब्जी की खेती को क्षति पहुंची है।
खेतों में पानी भरने से मिर्च, टमाटर, सरसों और अरहर की फसलों को भी नुकसान की आशंका है। गेहूं की फसलें जमीन पर लेट गई हैं और अरहर चना की फसलों को भी नुकसान हुआ है। ओले पड़ने से पके टमाटर फट गए हैं। अगेती खेती करने वाले किसानों की सब्जी की पौधे भिंडी, लौकी, नेनुआ और करेला भी पानी में डूबी हुई थी। फूलों के पौधे भी खेतों में लेट गए हैं। आम का बौर भी गिर गया। शाहंशाहपुर के किसान मुकेश सिंह, आसाराम, पवन राज कुमार पाल, पप्पू पटेल ने बताया कि उनकी मिर्च टमाटर तथा सरसों की खेती को काफी नुकसान हुआ है।
उधर, उप निदेशक (कृषि रक्षा) डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा में गेहूं की भारी मात्रा में क्षति हुई है। बड़ागाव विकास खंड के 53 गांवों में 5-10 प्रतिशत, 12 गांवों में 20-30 प्रतिशत, और छह गांवों में 40-50 प्रतिशत तक क्षति का आंकलन किया गया है। वहीं तिलहन में सरसों की 15 से 20 प्रतिशत क्षति हुई है। चिरईगांव के 90 गांवों 15 से 25, हरहुआ के सात गांवों में 15 से 20 और पिंडरा विकास खंड छह गांवों में 10 से 20 और 45 गांवों में 15 से 53 प्रतिशत तक क्षति हुई है। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य ने क्षति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की गई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 8395 किसानों को बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा मिलेगा। किसानों को 25 फीसदी मुआवजा तुरंत मिल जाएगा। फसल का बीमा नहीं कराने वाले किसानों को सर्वे के बाद राजस्व विभाग मुआवजा देगा।
सुभाष मौर्य, कृषि अधिकारी