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रिश्वतखोरों पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Tue, 30 Jun 2015 02:08 AM IST
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वाराणसी। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से हो रही है। बनारस में भ्रष्ट और रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों की कुंडली तैयार हो रही है। सूची तैयार करने का जिम्मा खुफिया विभाग और जांच एजेंसियों को सौंपा गया है। जांच टीम उन लोगों से भी संपर्क कर रही है जिन्होंने अपने काम के लिए अधिकारी या कर्मचारी को रिश्वत दी है अथवा रिश्वत न देने की वजह से उनका काम अटका हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक भ्रष्ट अधिकारियों की सूची तैयार करने का काम एक महीने से चल रहा है। लोगों से पूछा जा रहा है कि कहां, कौन भ्रष्टाचार में लिप्त है और किस-किसने उनसे रिश्वत मांगी है। प्रधानमंत्री मोदी के रवींद्रपुरी स्थित जनसंपर्क कार्यालय में आई भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद पीएमओ के निर्देश पर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों की कुंडली तैयार की जा रही है। भ्रष्टाचार और रिश्वत की सर्वाधिक शिकायतें लोक निर्माण विभाग, जलकल, स्वास्थ्य और बिजली के अलावा रेलवे
से जुड़ी थीं, जहां आज भी नौकरी, नीलामी और ठेकेदारी के नाम पर रिश्वतखोरी चरम पर है। जांच एजेंसियों ने केंद्र और राज्य सरकार के उन विभागों को भी निशाने पर रखा है जिन्हें विकास से संबंधित कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते शहर के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार है। कई प्रोजेक्ट शुरू भी हो चुके हैं। जांच एजेंसियों के निशाने पर वे विभाग भी हैं जो विकास के नाम पर केवल बजट बनाते हैं और साल पूरा होने पर रिवाइज इस्टीमेट का खेल शुरू होता है।
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सूत्रों के मुताबिक भ्रष्ट अधिकारियों की सूची तैयार करने का काम एक महीने से चल रहा है। लोगों से पूछा जा रहा है कि कहां, कौन भ्रष्टाचार में लिप्त है और किस-किसने उनसे रिश्वत मांगी है। प्रधानमंत्री मोदी के रवींद्रपुरी स्थित जनसंपर्क कार्यालय में आई भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद पीएमओ के निर्देश पर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों की कुंडली तैयार की जा रही है। भ्रष्टाचार और रिश्वत की सर्वाधिक शिकायतें लोक निर्माण विभाग, जलकल, स्वास्थ्य और बिजली के अलावा रेलवे
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से जुड़ी थीं, जहां आज भी नौकरी, नीलामी और ठेकेदारी के नाम पर रिश्वतखोरी चरम पर है। जांच एजेंसियों ने केंद्र और राज्य सरकार के उन विभागों को भी निशाने पर रखा है जिन्हें विकास से संबंधित कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते शहर के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार है। कई प्रोजेक्ट शुरू भी हो चुके हैं। जांच एजेंसियों के निशाने पर वे विभाग भी हैं जो विकास के नाम पर केवल बजट बनाते हैं और साल पूरा होने पर रिवाइज इस्टीमेट का खेल शुरू होता है।
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