सोरहिया व्रत: सिर पर बांस की डलिया, हाथों में मां का मुखौटा; महालक्ष्मी मंदिर में तड़के से लगी लंबी कतारें
सोरहिया मेले में सोमवार को महिलाओं की भीड़ उमड़ी। भोर चार बजे से कतार में लगी महिलाओं ने कुंड में स्नान कर महालक्ष्मी मंदिर में पूजा की। 16 अंजलि जल, दूर्वा, अक्षत और सोरहिया डोरा अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
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लक्सा स्थित लक्ष्मीकुंड पर चल रहे 16 दिवसीय पारंपरिक सोरहिया मेले में सोमवार को महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। भोर से ही कुंड परिसर और महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा। संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ महिलाओं ने लक्ष्मीकुंड में आस्था की डुबकी लगाई और 16 दिवसीय कठिन व्रत का संकल्प लिया।
भीड़ से बचने के लिए महिलाएं तड़के चार बजे से ही मंदिर के बाहर कतार में लग गईं। पंचामृत स्नान और नूतन शृंगार के बाद मंदिर के कपाट खुले तो पूरा परिसर मां लक्ष्मी के जयकारों और श्रीसूक्त के मंत्रोच्चार से गूंज उठा। महिलाओं ने पूजा के दौरान 16 अंजलि जल, 16 दूर्वा, 16 अक्षत और 16 गांठ वाला रक्षा-सूत्र यानी सोरहिया डोरा मां के चरणों में अर्पित किया। इसके बाद डोरा अपनी कलाई में बांधा और मंदिर के गर्भगृह की 16 परिक्रमा कर परिवार के आरोग्य की कामना की।
मेले में सुबह से ही पूजन सामग्री की दुकानों पर भी रौनक रही। श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी के मुखौटों, मिट्टी की प्रतिमाओं, 16 बत्ती वाले मिट्टी के दीपों और अन्य पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी की। पूजन परंपरा के अनुसार महिलाएं मां लक्ष्मी के मुखौटों और मिट्टी की प्रतिमाओं को बांस की डलिया यानी पौती में सजाकर सिर पर रखकर घर ले जाती हैं। इनकी अगले 16 दिनों तक घर में विधि-विधान से नित्य पूजा की जाती है।
दुकानदारों के अनुसार भोर से ही मेले में खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी थी। मुखौटों और प्रतिमाओं के अलावा सोरहिया डोरा, दीप और अन्य पूजन सामग्री की बिक्री भी तेज रही। मेले के कारण लक्ष्मीकुंड और आसपास के क्षेत्र में दिनभर चहल-पहल बनी रही। आस्था के साथ मेले में स्थानीय दुकानदारों का कारोबार भी बढ़ा।