{"_id":"5b052f0b4f1c1be5408b73be","slug":"sons-his-mother-dead-body-kept-in-house-for-pension","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बनारसः चार माह से घर में छिपाकर रखा था मां का शव, सच्चाई सामने आने के बाद मचा हड़कंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारसः चार माह से घर में छिपाकर रखा था मां का शव, सच्चाई सामने आने के बाद मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 24 May 2018 02:08 PM IST
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घर में रखा शव
- फोटो : अमर उजाला
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मां और बच्चों के संबंध को तार-तार कर देने वाला अमानवीय मामला सामने आया है। बेरोजगार चार बेटों, एक बेटी और एक बहू ने गुजर-बसर का कोई आसरा नहीं देखा तो 13 हजार रुपये पेंशन पाने वाली 80 वर्षीय बूढ़ी मां की मौत के बाद अंतिम संस्कार ना करके केमिकल युक्त लेप लगाकर शव घर पर ही रख लिया।
तकरीबन चार माह दस दिन बाद बुधवार को दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हुआ तो सौ नंबर पर सूचना दी गई और पुलिस आई। वृद्धा के सड़े-गले बदबूदार शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने में पुलिस को चारों बेटों और बेटी के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
इस दौरान मौके पर तमाशबीनों की भारी भीड़ उमड़ी रही और लोग बेटों-बेटी को कोसते नजर आए। वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र के कबीर नगर स्थित आवास विकास कॉलोनी के चार मंजिला इमारत के भूतल पर बने फ्लैट में कस्टम विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षक दया प्रसाद परिवार के साथ रहते थे।
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दया प्रसाद की वर्ष 2000 में मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी अमरावती देवी और बेटा रवि प्रकाश, देव प्रकाश, ज्योति प्रकाश, योगेश्वर प्रकाश, गिरीश प्रसाद और विजय लक्ष्मी साथ रहते थे। अमरावती को प्रतिमाह मिलने वाली पेंशन से परिवार का खर्च चलता था। ज्योति प्रकाश और देव प्रकाश को छोड़कर अन्य किसी का विवाह नहीं हुआ है।
अधिवक्ता ज्योति प्रकाश ने बताया कि बीते साल नवंबर महीने में मां की तबीयत खराब हुई तो बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। 14 जनवरी को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया तो शव को घर ले आए और अंतिम संस्कार की तैयारी की जाने लगी।
इसी दौरान विजय लक्ष्मी, रवि, गिरीश, योगेश्वर और देव ने कहा कि मां के मस्तिष्क में जान है। इसके साथ ही, अमरावती देवी के शव को चौकी पर रखकर कोई लेप लगाया गया और कमरे को ठंडा रखने के लिए एसी लगवाया गया।
ज्योति ने बताया कि उन्होंने विरोध किया तो भाई-बहन ने उनके साथ मारपीट की। इसके बाद ज्योति घर छोड़ कर किराये के मकान में रहने लगे।
इस बीच लंका स्थित सेंट्रल बैंक के अमरावती देवी के खाते से रुपये निकाले जाते रहे।
आखिरी बार रवि प्रकाश ने 17 मई को मां का इलाज कराने के नाम पर खाते से 40 हजार रुपया निकाला था और 76 हजार रुपया बचा है। बुधवार की सुबह सौ नंबर पर आए फोन के आधार पर सीओ भेलूपुर मौके पर पहुंचे और पूछताछ शुरू की।
चारों भाई, एक बहू और बहन ने कहा कि उनकी मां जिंदा है और पुलिस के आने का विरोध करने लगे। हालांकि किसी की एक न सुनते हुए पुलिस मकान में घुसकर दुर्गंधयुक्त शव को बाहर निकलवाई।
इस संबंध में सीओ भेलूपुर एपी सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह और समय स्पष्ट होने के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। कस्टम विभाग को पत्र लिखकर अमरावती देवी की मौत के बाद ली गई पेंशन की रकम को वसूलने के लिए कहा जाएगा।
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तकरीबन चार माह दस दिन बाद बुधवार को दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हुआ तो सौ नंबर पर सूचना दी गई और पुलिस आई। वृद्धा के सड़े-गले बदबूदार शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने में पुलिस को चारों बेटों और बेटी के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
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इस दौरान मौके पर तमाशबीनों की भारी भीड़ उमड़ी रही और लोग बेटों-बेटी को कोसते नजर आए। वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र के कबीर नगर स्थित आवास विकास कॉलोनी के चार मंजिला इमारत के भूतल पर बने फ्लैट में कस्टम विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षक दया प्रसाद परिवार के साथ रहते थे।
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दया प्रसाद की वर्ष 2000 में मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी अमरावती देवी और बेटा रवि प्रकाश, देव प्रकाश, ज्योति प्रकाश, योगेश्वर प्रकाश, गिरीश प्रसाद और विजय लक्ष्मी साथ रहते थे। अमरावती को प्रतिमाह मिलने वाली पेंशन से परिवार का खर्च चलता था। ज्योति प्रकाश और देव प्रकाश को छोड़कर अन्य किसी का विवाह नहीं हुआ है।
अधिवक्ता ज्योति प्रकाश ने बताया कि बीते साल नवंबर महीने में मां की तबीयत खराब हुई तो बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। 14 जनवरी को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया तो शव को घर ले आए और अंतिम संस्कार की तैयारी की जाने लगी।
इसी दौरान विजय लक्ष्मी, रवि, गिरीश, योगेश्वर और देव ने कहा कि मां के मस्तिष्क में जान है। इसके साथ ही, अमरावती देवी के शव को चौकी पर रखकर कोई लेप लगाया गया और कमरे को ठंडा रखने के लिए एसी लगवाया गया।
ज्योति ने बताया कि उन्होंने विरोध किया तो भाई-बहन ने उनके साथ मारपीट की। इसके बाद ज्योति घर छोड़ कर किराये के मकान में रहने लगे।
इस बीच लंका स्थित सेंट्रल बैंक के अमरावती देवी के खाते से रुपये निकाले जाते रहे।
आखिरी बार रवि प्रकाश ने 17 मई को मां का इलाज कराने के नाम पर खाते से 40 हजार रुपया निकाला था और 76 हजार रुपया बचा है। बुधवार की सुबह सौ नंबर पर आए फोन के आधार पर सीओ भेलूपुर मौके पर पहुंचे और पूछताछ शुरू की।
चारों भाई, एक बहू और बहन ने कहा कि उनकी मां जिंदा है और पुलिस के आने का विरोध करने लगे। हालांकि किसी की एक न सुनते हुए पुलिस मकान में घुसकर दुर्गंधयुक्त शव को बाहर निकलवाई।
इस संबंध में सीओ भेलूपुर एपी सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह और समय स्पष्ट होने के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। कस्टम विभाग को पत्र लिखकर अमरावती देवी की मौत के बाद ली गई पेंशन की रकम को वसूलने के लिए कहा जाएगा।
ऐसे सामने आया मौत का सच
चार बेटों, बेटी और एक बहू की अमानवीय करतूत
- फोटो : अमर उजाला
कबीर नगर की आवास विकास कॉलोनी की अमरावती देवी के फ्लैट का बिजली कनेक्शन यदि बीते हफ्ते न काटा जाता तो शायद उनकी मौत का राज इतनी जल्दी सामने नहीं आ पाता। दरअसल, बिजली कनेक्शन कटने से एसी चलना बंद हो गया था और अमरावती देवी के शव से बदबू उठना शुरू हुई।
बुधवार को जब अमरावती देवी के घर से तकरीबन 25-30 फीट की दूरी पर खड़े लोगों को अजीब सी दुर्गंध आई तो शंकावश किसी ने सौ नंबर पर फोन किया और मामला सामने आया। कॉलोनी के लोगों ने बताया कि अमरावती देवी अपने बच्चों पर जान छिड़कती थी।
आवास विकास कॉलोनी और आसपास के लोगों ने बताया कि 14 जनवरी को अमरावती देवी की मौत हुई तो अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसी आगे आए। कुछेक लोगों ने कफन सहित अन्य सामग्रियों का इंतजाम भी किया लेकिन वृद्धा के बेटों-बेटी ने कहा कि उनकी मां का मस्तिष्क जिंदा है और वो जिंदा हैं।
इसके बाद बेटों-बेटी ने पड़ोसियों, सब्जी और दूध वाले सहित किसी के भी घर आने पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां तक कि रिश्तेदारों को भी घर नहीं आने दिया जाता था। सभी का कहना रहता था कि मां गंभीर रूप से बीमार हैं और किसी की भी आवाजाही से उन्हें परेशानी होगी।
वहीं, फ्लैट की बात की जाए तो जिस कमरे में अमरावती देवी का शव रखा था उसमें एसी लगा हुआ था। इसके अलावा घर में सही तरीके से खाने-पीने का सामान भी नहीं दिखा।
40 वर्ष से ज्यादा आयु के भाई-बहन बेरोजगारी के साथ ही विवाह न होने से भी अवसाद ग्रस्त प्रतीत हुए। वृद्धा का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया तो मौके पर कॉलोनी के लोगों और राहगीरों की भीड़ जुटी रही।
घर में शव रखकर भला कैसे रहते रहे होंगे
वृद्धा का शव जब उनके घर से बाहर निकाला गया तो मौजूद लोगों का दुर्गंध के कारण खड़ा होना मुश्किल हो गया। सभी की जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिरकार घर में मां का शव रखकर सभी सुकून से कैसे रहते रहे होंगे। वहीं, दुर्गंध से वृद्धा के बेटे, बहू और बेटी पूरी तरह से बेपरवाह दिखे और उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि वो सब ऐसे माहौल में रहने के आदी हैं।
फरवरी से अब तक चार बार चेक से रुपये निकाले
वृद्धा अमरावती देवी का लंका स्थित सेंट्रल बैंक में खाता था। इसी में उनकी प्रतिमाह पेंशन आती थी। इधर, पेंशन की राशि बढ़ने वाली थी। पुलिस ने बताया कि 14 जनवरी को वृद्धा की मौत के बाद उनके हस्ताक्षर युक्त चेक से उनके खाते से बेटे रवि प्रकाश ने नौ फरवरी को 13300 रुपये, नौ मार्च को 13000 रुपये, 12 अप्रैल को 13500 रुपये और 17 मई को 40000 रुपये चेक के माध्यम से निकाला था।
पुलिस के अनुसार चूंकि पेंशनर्स का सत्यापन प्रत्येक वर्ष के आखिरी महीने में होता है। इस वजह से वृद्धा के बेटे इस साल के अंत तक खाते से पेंशन की रकम निकालने की सोच रखे थे।
जिस मां ने जन्म दिया उसके साथ ऐसा सलूक
अमरावती देवी का शव जब उनके घर से बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस ले जाया जा रहा था तो इस दौरान भीड़ में मौजूद कई लोग खासे नाराज भी दिखे। कहना था कि जिस मां ने जन्म दिया और पालन-पोषण कर बड़ा किया, उसके शव के साथ ऐसा सलूक करने वाले बेटों और बेटी के जीवन पर धिक्कार है। लोगों ने पुलिस से मांग की कि सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कठोर सजा दिलाई जाए।
फरवरी से अब तक चार बार चेक से रुपये निकाले
वृद्धा अमरावती देवी का लंका स्थित सेंट्रल बैंक में खाता था। इसी में उनकी प्रतिमाह पेंशन आती थी। इधर, पेंशन की राशि बढ़ने वाली थी। पुलिस ने बताया कि 14 जनवरी को वृद्धा की मौत के बाद उनके हस्ताक्षर युक्त चेक से उनके खाते से बेटे रवि प्रकाश ने नौ फरवरी को 13300 रुपये, नौ मार्च को 13000 रुपये, 12 अप्रैल को 13500 रुपये और 17 मई को 40000 रुपये चेक के माध्यम से निकाला था।
पुलिस के अनुसार चूंकि पेंशनर्स का सत्यापन प्रत्येक वर्ष के आखिरी महीने में होता है। इस वजह से वृद्धा के बेटे इस साल के अंत तक खाते से पेंशन की रकम निकालने की सोच रखे थे।
जिस मां ने जन्म दिया उसके साथ ऐसा सलूक
अमरावती देवी का शव जब उनके घर से बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस ले जाया जा रहा था तो इस दौरान भीड़ में मौजूद कई लोग खासे नाराज भी दिखे। कहना था कि जिस मां ने जन्म दिया और पालन-पोषण कर बड़ा किया, उसके शव के साथ ऐसा सलूक करने वाले बेटों और बेटी के जीवन पर धिक्कार है। लोगों ने पुलिस से मांग की कि सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कठोर सजा दिलाई जाए।
चार बेटे नकारा, बेटी बोली मैं लोजपा की उपाध्य
कस्टम विभाग में अधीक्षक पद पर तैनात रहे दया प्रसाद ने अपने पांचों बेटों और बेटी की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सभी को अच्छे से पढ़ाया-लिखाया लेकिन एक को छोड़ कर अन्य चार भाई दिन भर घर पर ही रहते थे।
उधर, बेटी विजय लक्ष्मी ने पुलिस और पत्रकारों को प्रभाव में लेने के लिए खुद को लोजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बताई और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के साथ की अपनी फोटो दिखाई और उनसे बात कराने को कही। हालांकि उसकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
आखिर कौन आता था हर दूसरे दिन छोटे कद का
पड़ोसियों के अनुसार वृद्धा अमरावती देवी के घर में 14 जनवरी के बाद से सिर्फ एक छोटे कद का आदमी हर दूसरे दिन आता था। कॉलोनी के लोगों ने आशंका जताई कि संभवत: वही वृद्धा के शव पर केमिकल युक्त लेप लगाता रहा होगा। सिर्फ एक आदमी की आवाजाही और अन्य के प्रवेश पर प्रतिबंध से कॉलोनी के लोगों को वृद्धा के बेटों और बेटी पर शक हुआ।
हालांकि वृद्धा के शव पर कौन सा केमिकल युक्त लेप लगाया जाता था इस संबंध में बेटों और बेटी ने कुछ नहीं बताया। कुछ पूछे जाने पर सभी पत्रकारों से झगड़ा करने पर उतारू हो जा रहे थे। पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही पता चल सकेगा कि शव पर कैसा लेप लगाया जाता था।
उधर, बेटी विजय लक्ष्मी ने पुलिस और पत्रकारों को प्रभाव में लेने के लिए खुद को लोजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बताई और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के साथ की अपनी फोटो दिखाई और उनसे बात कराने को कही। हालांकि उसकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
आखिर कौन आता था हर दूसरे दिन छोटे कद का
पड़ोसियों के अनुसार वृद्धा अमरावती देवी के घर में 14 जनवरी के बाद से सिर्फ एक छोटे कद का आदमी हर दूसरे दिन आता था। कॉलोनी के लोगों ने आशंका जताई कि संभवत: वही वृद्धा के शव पर केमिकल युक्त लेप लगाता रहा होगा। सिर्फ एक आदमी की आवाजाही और अन्य के प्रवेश पर प्रतिबंध से कॉलोनी के लोगों को वृद्धा के बेटों और बेटी पर शक हुआ।
हालांकि वृद्धा के शव पर कौन सा केमिकल युक्त लेप लगाया जाता था इस संबंध में बेटों और बेटी ने कुछ नहीं बताया। कुछ पूछे जाने पर सभी पत्रकारों से झगड़ा करने पर उतारू हो जा रहे थे। पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही पता चल सकेगा कि शव पर कैसा लेप लगाया जाता था।
समाजशास्त्रियों ने दुर्गाकुंड का वाकया सुना तो रह गए अवाक
र्गाकुंड क्षेत्र की अमरावती देवी से जुड़ा वाकया महानगर के समाजशास्त्रियों की जानकारी में आया तो वो अवाक रह गए। कहना था कि यह मानवता को रसातल में ले जाने वाली घटना है।
बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. मंजीत चतुर्वेदी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बहुत कम ही सुनने और देखने को मिलती हैं। जिस तरह की घटना हुई वह मानवता को रसातल में ले जाने वाली है।
जिस तरह की हरकत परिवार के लोगों ने की है। इसे द्वि मानवीयकरण की संज्ञा भी दी जा सकती है। विदेशों में तो कभी-कभी ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं लेकिन उसके पीछे मानसिक विकार मुख्य वजह होती है। अब आर्थिक कारणों से घटी यह घटना बहुत गंभीर है। ऐसा कर एक परिवार ने संबंधों और संस्कार को नजरअंदाज किया है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. रवि प्रकाश पांडेय ने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में नैतिकता को भूलने वाले लोग आज इस कदर गिर गए हैं, कि माता-पिता की लाश के अंगूठे का प्रयोग कर धन अर्जित करने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
हालांकि ऐसे लोगों का प्रतिशत बहुत कम है, फिर भी इस तरह का रुझान और सोच समाज को पथभ्रष्ट बनाने के लिए पर्याप्त है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रारंभ से ही शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में ऐसा संस्कार दिया जाए, जिससे कि ऐसी सोच और कार्य को कभी भी बल न मिले।
बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. मंजीत चतुर्वेदी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बहुत कम ही सुनने और देखने को मिलती हैं। जिस तरह की घटना हुई वह मानवता को रसातल में ले जाने वाली है।
जिस तरह की हरकत परिवार के लोगों ने की है। इसे द्वि मानवीयकरण की संज्ञा भी दी जा सकती है। विदेशों में तो कभी-कभी ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं लेकिन उसके पीछे मानसिक विकार मुख्य वजह होती है। अब आर्थिक कारणों से घटी यह घटना बहुत गंभीर है। ऐसा कर एक परिवार ने संबंधों और संस्कार को नजरअंदाज किया है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. रवि प्रकाश पांडेय ने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में नैतिकता को भूलने वाले लोग आज इस कदर गिर गए हैं, कि माता-पिता की लाश के अंगूठे का प्रयोग कर धन अर्जित करने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
हालांकि ऐसे लोगों का प्रतिशत बहुत कम है, फिर भी इस तरह का रुझान और सोच समाज को पथभ्रष्ट बनाने के लिए पर्याप्त है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रारंभ से ही शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में ऐसा संस्कार दिया जाए, जिससे कि ऐसी सोच और कार्य को कभी भी बल न मिले।
सोशल मीडिया पर देर रात तक सुर्खियों में रहा मामला
वृद्धा की मौत और शव घर पर रखने का मामला सार्वजनिक हुआ तो शहर भर के व्हाट्स एप ग्रुप पर लोग एक-दूसरे को शेयर करने लगे। कई लोगों ने घटनास्थल की फोटो और वीडियो भी व्हाट्स एप और फेसबुक सहित सोशल मीडिया के अन्य माध्यमोें पर भी शेयर की।
सुबह से लेकर देर रात तक सोशल मीडिया पर यह मामला सुर्खियों में रहा और शहर की प्रमुख अड़ियों पर भी घटना को लेकर चर्चाएं जारी रहीं। लोगों का कहना था कि बनारस में अपने किस्म की यह पहली घटना है। इस दौरान अप्रैल 2018 में कोलकाता निवासी युवक द्वारा पेंशन के लिए मां का शव डीप फ्रीजर में रखने की घटना को भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ साझा किया।
सुबह से लेकर देर रात तक सोशल मीडिया पर यह मामला सुर्खियों में रहा और शहर की प्रमुख अड़ियों पर भी घटना को लेकर चर्चाएं जारी रहीं। लोगों का कहना था कि बनारस में अपने किस्म की यह पहली घटना है। इस दौरान अप्रैल 2018 में कोलकाता निवासी युवक द्वारा पेंशन के लिए मां का शव डीप फ्रीजर में रखने की घटना को भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ साझा किया।