{"_id":"5d34c4f78ebc3e6c973616e6","slug":"sonbhadra-varanasi-news-vns474164359","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमीन संबंधी पुराने विवादों को चिह्नित कर करें मानीटरिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमीन संबंधी पुराने विवादों को चिह्नित कर करें मानीटरिंग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। सोनभद्र में जमीन विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष के बाद जिले की पुलिस भी इस संबंध में गंभीर हुई है। एसएसपी ने थानेदारों, क्षेत्राधिकारियों, एसपी ग्रामीण और एसपी सिटी को कहा है कि साल भर से ज्यादा पुराने जमीन विवाद से संबंधित प्रकरणों को सूचीबद्ध कराएं। ऐसे विवादों की नियमित मानीटरिंग करते हुए राजस्व कर्मियों की मदद से उनके समाधान का रास्ता खोजा जाए। जमीन विवाद को लेकर यदि कहीं भी अप्रिय घटना हुई तो उसके लिए बीट आरक्षी, चौकी प्रभारी, थानेदार और क्षेत्राधिकारी जिम्मेदार होंगे।
तहसील दिवस और समाधान दिवस पर सर्वाधिक शिकायतें जमीन विवाद की आती है। जमीन विवाद को लेकर आए दिन जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मारपीट और जानलेवा हमले जैसे प्रकरण भी सामने आते रहते हैं। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि थानेदारों और क्षेत्राधिकारियों को कहा गया है कि वह अपने क्षेत्र के जमीन विवाद संबंधी 10-10 पुराने प्रकरणों को चिह्नित करें। एसपी ग्रामीण और एसपी सिटी ऐसे पांच-पांच पुराने प्रकरण चिह्नित करेंगे। जमीन विवाद संबंधी इन पुराने प्रकरणों की नियमित मानीटरिंग की जाए और राजस्व कर्मियों की मदद से यदि उनके समाधान का स्थायी रास्ता निकल सकता है तो उसे अमल में लाया जाए। किसी भी स्थिति में जमीन विवाद को लेकर शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
तहसील दिवस और समाधान दिवस पर सर्वाधिक शिकायतें जमीन विवाद की आती है। जमीन विवाद को लेकर आए दिन जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मारपीट और जानलेवा हमले जैसे प्रकरण भी सामने आते रहते हैं। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि थानेदारों और क्षेत्राधिकारियों को कहा गया है कि वह अपने क्षेत्र के जमीन विवाद संबंधी 10-10 पुराने प्रकरणों को चिह्नित करें। एसपी ग्रामीण और एसपी सिटी ऐसे पांच-पांच पुराने प्रकरण चिह्नित करेंगे। जमीन विवाद संबंधी इन पुराने प्रकरणों की नियमित मानीटरिंग की जाए और राजस्व कर्मियों की मदद से यदि उनके समाधान का स्थायी रास्ता निकल सकता है तो उसे अमल में लाया जाए। किसी भी स्थिति में जमीन विवाद को लेकर शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन