सोनभद्र नरसंहार : सरकारी मदद के दावे खोखले, पीड़ित परिवारों के पास कर्मकांड के लिए भी नहीं हैं पैसे
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सोनभद्र हत्याकांड में शासन भले ही पूरी मदद का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही है। उभ्भा नरसंहार में मृत व्यक्ति के परिवारवालों को मदद के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली है। कई के परिवारों के पास तो कर्मकांड तक के लिए रुपये नहीं हैं।
बीते बुधवार को उभ्भा गांव में भूमि विवाद में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी। जबकि 28 लोग घायल हैं। प्रशासन का मृतकों के आश्रितों और घायलों को मदद देने का वादा अभी पूरा नहीं हो सका है।
शुक्रवार को मृतक अशोक की पत्नी लालदेई ने बताया कि उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। ये सभी नाबालिग हैं। उसके पति मजदूरी कर घर चलाते थे। उनकी मौत से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके पास कर्मकांड करने तक के लिए रुपये नहीं है।
मृत रामसुंदर की पत्नी सीता का कहना था कि पति की मौत होने के बाद वह नाबालिग बच्चों लल्लू, पिंटू, मनोज, विनोद, मनीषा और लोलारक का भरण पोषण कैसे करेगी, इस बात की चिंता उसे सता रही है। बच्चों को दो वक्त की रोटी देने के लिए सोचना पड़ रहा है। उसका कहना था कि पति का अंतिम संस्कार करने के लिए किससे मदद मांगे, कुछ समझ नहीं आ रहा।
गोलीकांड में जान गंवाने वाले राजेश की पत्नी प्रतिभा ने कहा कि नाबालिग बच्चों राजकुमारी, तारा और अंकुश का भरण पोषण करना उसके लिए चुनौती है। यहीं हाल अन्य मृतकों के आश्रितों का है। आश्रितों ने कहा कि शासन और जिला प्रशासन सिर्फ मदद के नाम भरोसा दे रहा है। अभी तक अंत्येष्टि के लिए भी आर्थिक मदद नहीं की गई है।