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पशुओं का दर्द देखकर सिहर उठती है सोनम, स्कूल बैग में रखती हैं जानवरों के प्राथमिक उपचार का सामान
Thu, 09 Jan 2020 04:54 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Thu, 09 Jan 2020 04:54 PM IST
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स्कूल बैग में रखती हैं जानवरों के प्राथमिक उपचार का सामान
- फोटो : अमर उजाला।
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वाराणसी शहर की कालोनियों, चौराहों, पार्कों, सड़कों के किनारों पर अगर कोई पशु चोट लगने के बाद दर्द से कराहता दिख जाता है तो सोनम सिहर उठती है। सब काम भूलकर वह बैग से तुरंत बैंडेज, इंजेक्शन, मलहम निकालकर उसे न केवल लगाती है, बल्कि बेहतर इलाज के लिए उसे पशु अस्पताल तक भी ले जाती है, जिससे कि उसका उपचार हो सके।
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बेनियाबाग निवासी सोनम को लोग अब जानवरों के मसीहा के नाम से जानते हैं। उसके इस कार्य में परिवारवालों का भी पूरा साथ मिल रहा है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा सोनम का कहना है कि समाचार पत्र विक्रेता पिता शोभन राम के साथ ही सबके सहयोग से वह अपने मिशन में आगे बढ़ रही है।
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दो साल पहले वह अपने घर में बैठी थी, देखा की कालोनी में एक कुतिया मर गई है। उसके बच्चे पास में ही खड़े रहे। यह देखा नहीं गया तो बच्चों को पालना शुरू की। वह बड़े हो गए लेकिन बीमारी की वजह से मर गए। सोनम अपने बैग में हर समय प्राथमिक उपचार के लिए मलहम, पट्टी, पशुओं को लगने वाला इंजेक्शन, दवा, बिस्किट आदि रखती हैं।
गंभीर रूप से घायल जानवरों को पशु अस्पताल ले जाती हैं। सोनम कहती है कि अगर कोई जानवरों को मारता है तो दुख होता है। हर किसी को जानवरों से प्रेम करना चाहिए। जानवरों को मारना नहीं चाहिए।