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UP: बेटे पर अपहरण-दुष्कर्म का केस, 70 महिलाओं के साथ मां ने घेरा थाना; प्रदर्शन के दौरान बेहोश हुईं नानी

Fri, 03 Jul 2026 05:50 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 03 Jul 2026 05:50 PM IST
सार

Varanasi News: चौबेपुर में नाबालिग अपहरण और गैंगरेप मामले में बेटे को झूठा फंसाने का आरोप लगाते हुए करीब 70 महिलाओं ने थाने पर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने निष्पक्ष व साक्ष्य आधारित जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। पुलिस ने बताया कि एसीपी सारनाथ मामले की निष्पक्ष विवेचना कर रहे हैं।

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Son accused abduction and misdeed mother other women surround police station grandmother faints
चौबेपुर थाने पर हंगामा करतीं महिलाएं। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi Crime: चौबेपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव में पिछले महीने दर्ज नाबालिग के अपहरण एवं दुष्कर्म के मामले में आरोपित युवक के परिजनों ने शुक्रवार को थाने पर प्रदर्शन किया। युवक की मां के नेतृत्व में करीब 70 महिलाएं सुबह 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक थाने के बाहर जुटीं और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष व साक्ष्य आधारित जांच की मांग की।

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प्रदर्शन के दौरान आरोपी काजू की नानी दुईजा देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। मौके पर मौजूद पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नरपतपुर भेजा, जहां उनका उपचार कराया गया।
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सीवों चुनाडीह निवासी मीना देवी ने आरोप लगाया कि उनकी एक महिला से पहले से जमीन को लेकर रंजिश चल रही है। इसी दुश्मनी के चलते उनके पुत्र करन को नाबालिग के अपहरण एवं दुष्कर्म के मुकदमे में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि करन का घटना से कोई संबंध नहीं है और उसे साजिश के तहत आरोपी बनाया गया है।

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Son accused abduction and misdeed mother other women surround police station grandmother faints
बेहोश हुईं नानी को भेजा गया अस्पताल। - फोटो : संवाद

मीना देवी के अनुसार, नाबालिग के लापता होने के मामले में पुलिस ने उनके पुत्र करन और एक अन्य नाबालिग को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि विवेचना के दौरान उपलब्ध महत्वपूर्ण साक्ष्यों और तथ्यों की अनदेखी की गई।

उन्होंने दावा किया कि मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज धारा 164 के बयान सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे वास्तविक घटनाक्रम स्पष्ट हो सकता है। उनका यह भी आरोप है कि एक युवक नाबालिग को करीब 20 दिनों तक अपने रिश्तेदारों के यहां रखे रहा, लेकिन उसके बावजूद निर्दोष बच्चों को मुकदमे में आरोपी बनाया गया। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सभी साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया जाए और वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कुछ देर तक पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाकर शांत कराया। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि मामले की विवेचना एसीपी सारनाथ कर रहे हैं। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर निष्पक्ष एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी। किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होगा और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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