{"_id":"59ce1fd74f1c1bc8538b5065","slug":"some-big-shuffle-due-to-movement-by-bhu-girl-student","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू बवालः एक आंदोलन से बदली विश्वविद्यालय की तस्वीर, हुए कुछ बड़े फेरबदल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू बवालः एक आंदोलन से बदली विश्वविद्यालय की तस्वीर, हुए कुछ बड़े फेरबदल
amarujala.com, presented by पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Updated Sun, 01 Oct 2017 10:15 AM IST
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बीएचयू छात्राओं का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के मुख्य गेट पर छेड़खानी के विरोध में छात्राओं के नेतृत्वविहीन और सर्वदलीय आंदोलन का असर हुआ है। छात्राओं के समर्थन में बनारस से नई दिल्ली तक बुलंद हुई आवाज के कारण बड़े पैमाने पर फेरबदल और उलटफेर हुआ है।
विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार महिला चीफ प्रॉक्टर तैनात की गईं हैं। यही नहीं, महिला छात्रावासों में पहली बार महिला सुरक्षाकर्मी भी तैनात की जाएंगी। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सिक्योरिटी गार्ड्स की खाकी वर्दी बदलने की पांच दशक पुरानी मांग भी पूरी हो गई है।
बड़ी उपलब्धि यह रही कि छात्राओं को परिसर में जिन समस्याओं से जूझना पड़ता है, उनके बारे में अरसे बाद महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, मंडलायुक्त और मजिस्ट्रेट के सामने नि:संकोच अपनी बात बताने का अवसर मिला।
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न्यायिक आयोग में उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 21 सितंबर की रात बीएचयू परिसर में छात्रा के साथ छेड़खानी की वारदात के बाद विश्वविद्यालय की छात्राओं ने 22 सितंबर की सुबह छह बजे से आंदोलन शुरू किया।
आंदोलन का न कोई नेता था और न कोई राजनीतिक विचारधारा हावी थी। मुद्दा सिर्फ एक था, छात्राओं के लिए परिसर पूरी तरह सुरक्षित हो। छात्राओं की सुरक्षा संबंधी मांगों पर उनके समर्थन में विश्वविद्यालय के छात्र भी आए।
23 सितंबर की रात मनमाने तरीके से बीएचयू वीसी लॉज के सामने और फिर महिला महाविद्यालय के सामने सिक्योरिटी गार्ड्स और पुलिस ने छात्राओं-छात्रों और पत्रकारों को लाठियों से पीटा।
प्रकरण सुर्खियों में आया तो पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक ने भी गंभीर रुख अख्तियार किया।
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विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार महिला चीफ प्रॉक्टर तैनात की गईं हैं। यही नहीं, महिला छात्रावासों में पहली बार महिला सुरक्षाकर्मी भी तैनात की जाएंगी। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सिक्योरिटी गार्ड्स की खाकी वर्दी बदलने की पांच दशक पुरानी मांग भी पूरी हो गई है।
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बड़ी उपलब्धि यह रही कि छात्राओं को परिसर में जिन समस्याओं से जूझना पड़ता है, उनके बारे में अरसे बाद महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, मंडलायुक्त और मजिस्ट्रेट के सामने नि:संकोच अपनी बात बताने का अवसर मिला।
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न्यायिक आयोग में उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 21 सितंबर की रात बीएचयू परिसर में छात्रा के साथ छेड़खानी की वारदात के बाद विश्वविद्यालय की छात्राओं ने 22 सितंबर की सुबह छह बजे से आंदोलन शुरू किया।
आंदोलन का न कोई नेता था और न कोई राजनीतिक विचारधारा हावी थी। मुद्दा सिर्फ एक था, छात्राओं के लिए परिसर पूरी तरह सुरक्षित हो। छात्राओं की सुरक्षा संबंधी मांगों पर उनके समर्थन में विश्वविद्यालय के छात्र भी आए।
23 सितंबर की रात मनमाने तरीके से बीएचयू वीसी लॉज के सामने और फिर महिला महाविद्यालय के सामने सिक्योरिटी गार्ड्स और पुलिस ने छात्राओं-छात्रों और पत्रकारों को लाठियों से पीटा।
प्रकरण सुर्खियों में आया तो पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक ने भी गंभीर रुख अख्तियार किया।
आंदोलन के कारण चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा
बीएचयू में लाठीचार्ज का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
छात्राओं के लगभग 40 घंटे के आंदोलन का ही परिणाम रहा कि विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड भंग कर दिया गया और चीफ प्रॉक्टर को इस्तीफा देना पड़ा। प्रो. रोयाना सिंह के पहली महिला चीफ प्रॉक्टर नियुक्त होने के बाद परिसर में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछेगा।
गर्ल्स हॉस्टल से संकायों की ओर जाने वाले मार्ग छात्रों समेत अन्य लोगों के लिए प्रतिबंधित होंगे और रात में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था होगी। सिक्योरिटी गार्ड्स को छात्र-छात्राओं से बातचीत के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक माह परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
बीएचयू से पढ़े और यहां शिक्षकों, कर्मचारियों और पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि छात्राओं की आवाज को प्रदेश और केंद्र सरकार जिस तरह से सुना है, इसके सकारात्मक परिणाम जरूर दिखेंगे।
गर्ल्स हॉस्टल से संकायों की ओर जाने वाले मार्ग छात्रों समेत अन्य लोगों के लिए प्रतिबंधित होंगे और रात में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था होगी। सिक्योरिटी गार्ड्स को छात्र-छात्राओं से बातचीत के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक माह परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
बीएचयू से पढ़े और यहां शिक्षकों, कर्मचारियों और पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि छात्राओं की आवाज को प्रदेश और केंद्र सरकार जिस तरह से सुना है, इसके सकारात्मक परिणाम जरूर दिखेंगे।
एसएसपी ने भी दिया जांच का आदेश
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- फोटो : अमर उजाला
न्यायिक जांच आयोग, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, मजिस्ट्रेटी जांच और मंडलायुक्त की जांच के आदेश के बाद एसएसपी ने बवाल के मामले की विभागीय जांच का भी आदेश दे दिया है।
एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि एसपी प्रोटोकॉल जांच कर रिपोर्ट देंगे कि आखिरकार बवाल कैसे बढ़ा और किसने अपनी जिम्मेदारियां निभाने में लापरवाही बरती।
एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि एसपी प्रोटोकॉल जांच कर रिपोर्ट देंगे कि आखिरकार बवाल कैसे बढ़ा और किसने अपनी जिम्मेदारियां निभाने में लापरवाही बरती।
http://www.amarujala.com/video/uttar-pradesh/varanasi/viral-video-of-bhu-vc-kc-tripathi-talking-to-students-in-hostel