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बीएससी कृषि की एक सीट पर हैं छह आवेदक
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राजकीय महाविद्यालय जक्खिनी ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को 50 साल से उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। स्नातक में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। कृषि की पढ़ाई होने के कारण दूरदराज से भी विद्यार्थी आते हैं। बीएससी कृषि में एक सीट पर छह से अधिक आवेदक हैं। कृषि स्नातकों के दाखिले मेरिट के आधार पर होंगे।
राजकीय महाविद्यालय में मानविकी और कृषि संकाय की मान्यता है। 20 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। बीएससी कृषि की 65 सीटों के लिए 400 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। वहीं, बीए में 380 सीटें हैं और इनमें से 30 फीसदी बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। बीए में 489 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए हैं। प्राचार्य डॉ. उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड के प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के प्रार्थना पत्र लिए जा रहे हैं। परीक्षा परिणाम आने के बाद अंक पत्रों के आधार पर उनका आवेदन स्वीकार किया जाएगा। 25 और 26 जुलाई को महाविद्यालय में काउंसिलिंग होगी।
जम्मू कश्मीर से आते थे छात्र
प्राचार्य डॉ. उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि कृषि स्नातक की पढ़ाई के लिए शुल्क कम होने के कारण जम्मू कश्मीर के भी छात्र आते थे। मंगला सिंह, रामधारी सिंह, बृजभूषण सिंह, रत्नेश्वर नारायण सिंह, मणि सिंह ने बताया कि महाविद्यालय से कृषि और कला वर्ग में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दी है। साथ ही क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यहां स्नातकोत्तर की कक्षाएं भी होनी चाहिए।
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राजकीय महाविद्यालय में मानविकी और कृषि संकाय की मान्यता है। 20 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। बीएससी कृषि की 65 सीटों के लिए 400 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। वहीं, बीए में 380 सीटें हैं और इनमें से 30 फीसदी बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। बीए में 489 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए हैं। प्राचार्य डॉ. उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड के प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के प्रार्थना पत्र लिए जा रहे हैं। परीक्षा परिणाम आने के बाद अंक पत्रों के आधार पर उनका आवेदन स्वीकार किया जाएगा। 25 और 26 जुलाई को महाविद्यालय में काउंसिलिंग होगी।
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जम्मू कश्मीर से आते थे छात्र
प्राचार्य डॉ. उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि कृषि स्नातक की पढ़ाई के लिए शुल्क कम होने के कारण जम्मू कश्मीर के भी छात्र आते थे। मंगला सिंह, रामधारी सिंह, बृजभूषण सिंह, रत्नेश्वर नारायण सिंह, मणि सिंह ने बताया कि महाविद्यालय से कृषि और कला वर्ग में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दी है। साथ ही क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यहां स्नातकोत्तर की कक्षाएं भी होनी चाहिए।
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